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स्व. यशवंत शंकर धर्माधिकारी की जन्म शताब्दी समारोह का शुभारंभ

गोविंदराम सेकसरिया कॉलेज में दो दिवसीय कार्यक्रम, न्यायविदों व जनप्रतिनिधियों ने किया स्मरण

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स्व. यशवंत शंकर धर्माधिकारी की जन्म शताब्दी समारोह का शुभारंभ

गोविंदराम सेकसरिया कॉलेज में दो दिवसीय कार्यक्रम, न्यायविदों व जनप्रतिनिधियों ने किया स्मरण

समारोह में यश भारत के संस्थापक आशीष शुक्ला का भी हुआ सम्मान

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जबलपुर, 17 अगस्त। गोविंदराम सेकसरिया अर्थ-वाणिज्य स्वशासी महाविद्यालय में रविवार को स्व. यशवंत शंकर धर्माधिकारी जी की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में दो दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। समारोह का आरंभ दीप प्रज्वलन, वाग्देवी सरस्वती की प्रतिमा और धर्माधिकारी जी के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना ने पूरे माहौल को श्रद्धामय और गरिमामय बना दिया।मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने धर्माधिकारी जी को “बहुआयामी व्यक्तित्व, संगीत, कला, खेल और समाजसेवा के सच्चे साधक” के रूप में स्मरण किया।

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समारोह में विशिष्ट अतिथियों ने धर्माधिकारी जी के व्यक्तित्व और कृतित्व को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष धर्माधिकारी – “उनसे प्रभावित होकर ही मैंने अधिवक्ता बनने का निश्चय किया।”पूर्व न्यायाधीश, मुंबई उच्च न्यायालय सत्यरंजन धर्माधिकारी – “वे न्यायशास्त्र की पुस्तकों और ज्ञान का अथाह भंडार थे।”न्यायाधीश, केरल उच्च न्यायालय सुश्रुत धर्माधिकारी – “वे न्यायप्रिय, मृदुभाषी, विनोदप्रिय और अत्यंत सरल स्वभाव के धनी थे।”पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश देवदत्त माधव धर्माधिकारी (कार्यक्रम अध्यक्ष) – “वे व्यस्ततम समय में भी कला, संगीत और साहित्य के लिए समय निकालते थे। संस्कृति के प्रति उनकी रुचि अद्वितीय थी।”

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आयोजन का महत्व
महाविद्यालय शासी निकाय के अध्यक्ष डॉ. अमरेन्द्र पाण्डेय ने समारोह के प्रयोजन पर प्रकाश डाला, जबकि प्राचार्य डॉ. नरेशचंद्र त्रिपाठी ने अतिथियों का स्वागत और परिचय दिया।

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आशीष शुक्ला का सम्मान
इस अवसर पर “यश भारत” समाचार पत्र के संस्थापक आशीष शुक्ला का भी सम्मान किया गया। उन्हें शाल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। अतिथियों ने कहा कि आशीष शुक्ला ने निडर और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से समाज को नई दिशा दी है और उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

दूसरे दिन की झलकियाँ
समारोह के दूसरे दिन (18 अगस्त) न्यायशास्त्र, साहित्य और समाजसेवा पर विद्वानों व न्यायविदों के विचार प्रस्तुत होंगे। छात्र-छात्राएँ नृत्य, गीत और वाद्य संगीत की प्रस्तुतियाँ देंगे, जिन्हें धर्माधिकारी जी की कला-प्रियता को समर्पित किया गया है।
इसके अतिरिक्त “न्याय, संस्कृति और समाज में धर्माधिकारी जी का योगदान” विषय पर वरिष्ठ अधिवक्ताओं और न्यायाधीशों द्वारा विशेष व्याख्यान दिए जाएंगे।

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