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जबलपुर: अवैध कॉलोनियों के नामांतरण अब राजस्व न्यायालयों में नहीं होंगे – कलेक्टर का ऐतिहासिक निर्देश

 

जबलपुर, जबलपुर के कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्री दीपक सक्सेना ने आज एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिले में प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के संबंध में कई आवश्यक और कड़े निर्देश जारी किए। सभी अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) और कार्यपालिक मजिस्ट्रेटों के साथ हुई इस बैठक में, कलेक्टर ने विशेष रूप से अवैध गतिविधियों पर नकेल कसने और जनहित से जुड़े मुद्दों पर त्वरित कार्रवाई करने पर जोर दिया।

 

अवैध कॉलोनियों पर सीधी चोट: नामांतरण पर रोक

 

कलेक्टर श्री सक्सेना ने अपने निर्देशों में स्पष्ट किया कि अधिकारी अब केवल दफ्तरों तक सीमित न रहें, बल्कि फील्ड में सक्रिय रूप से मौजूद रहें और सभी प्रकार की अवैधानिक गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई करें। उन्होंने “गरुड़ दल” (जो अवैध गतिविधियों पर निगरानी के लिए गठित विशेष टीम है) को निर्देश दिया कि वे बिना किसी भय या दबाव के अपने दायित्वों का निर्वहन करें।

इस बैठक का एक सबसे महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला अवैध कॉलोनियों पर सीधी चोट है। कलेक्टर ने स्पष्ट रूप से घोषणा की कि अवैध कॉलोनियों के नामांतरण (संपत्ति हस्तांतरण का पंजीकरण) अब राजस्व न्यायालयों में नहीं किए जाएंगे। यह कदम अवैध रूप से विकसित हो रही कॉलोनियों को हतोत्साहित करने, अनियोजित शहरीकरण पर लगाम लगाने और भविष्य में ऐसे निर्माणों को रोकने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। यह निर्णय उन लोगों के लिए भी एक बड़ी चुनौती पेश करेगा जो अवैध रूप से भूखंड बेचकर लोगों को ठगते हैं।

 

त्योहारों में मिलावटखोरों पर शिकंजा

 

आगामी त्योहारों के सीजन को देखते हुए, कलेक्टर ने खाद्य पदार्थों, दूध और दूध से बने उत्पादों में मिलावट पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। यदि किसी भी प्रतिष्ठान में मिलावट पाई जाती है, तो दुकानों को बिना किसी देरी के सील किया जाए और मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

 

राजस्व प्रकरणों का त्वरित और प्राथमिकता से निराकरण

 

बैठक में कलेक्टर ने सभी कार्यपालिक मजिस्ट्रेटों को निर्देश दिए कि नए सेटअप के अंतर्गत राजस्व प्रकरणों का निराकरण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भूमि संबंधी विवादों और अन्य राजस्व संबंधी मामलों में जनता को अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े और उनके मामले समय पर निपटाए जा सकें। यह कदम जनता को त्वरित न्याय दिलाने और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने में सहायक होगा।

इस महत्वपूर्ण बैठक में अपर कलेक्टर सुश्री मिशा सिंह, श्री नाथूराम गोंड सहित सभी प्रमुख राजस्व अधिकारी मौजूद थे। कलेक्टर श्री दीपक सक्सेना के इन निर्देशों से जबलपुर जिले में प्रशासनिक व्यवस्थाओं में पारदर्शिता, दक्षता और सख्ती आने की उम्मीद है, जिससे नागरिकों को बेहतर सुविधाएँ मिलेंगी और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो सकेगा।

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