अपराधियों की नाकेबंदी के लिए पुलिस का बड़ा प्लान, जबलपुर में 1500 नए सीसीटीवी कैमरों की तैयारी

जबलपुर। शहर में बढ़ते अपराध, महिला सुरक्षा की चुनौतियों और अव्यवस्थित यातायात पर कड़ा शिकंजा कसने के लिए पुलिस प्रशासन ने तकनीक के सहारे बड़ी रणनीति तैयार की है। वर्तमान में जबलपुर में सक्रिय लगभग 650 सीसीटीवी कैमरों के नेटवर्क को और मजबूत करते हुए 1500 अतिरिक्त कैमरे लगाने का प्रस्ताव पुलिस मुख्यालय को भेजा गया है।
पुलिस प्रशासन का मानना है कि सड़कों, चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर हाईटेक निगरानी से अपराधियों की गतिविधियों पर तुरंत नजर रखी जा सकेगी। प्रस्तावित कैमरों में फिक्स कैमरे, पैन-टिल्ट-जूम (पीटीजेड) और ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) जैसी अत्याधुनिक तकनीक शामिल है, जो संदिग्ध वाहनों की पहचान में अहम भूमिका निभाएगी।
तीन चरणों में मजबूत हो रहा कैमरा नेटवर्क
पुलिस के अनुसार, पहले चरण में शहर के 125 प्रमुख लोकेशन पर 615 कैमरे, जबकि तीसरे चरण में 9 स्थानों पर 60 कैमरे पहले ही लगाए जा चुके हैं। अब चौथे चरण के तहत 1500 नए कैमरों की मांग भेजी गई है, जिससे निगरानी का दायरा पूरे शहर में फैलेगा।
महिला सुरक्षा पर विशेष फोकस
पुलिस ने महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए 600 से अधिक कैमरे विशेष रूप से संवेदनशील इलाकों में लगाने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही जिला पुलिस द्वारा 700 अतिरिक्त कैमरे और यातायात पुलिस द्वारा 125 लोकेशन पर एसवीडी कैमरे लगाने की योजना बनाई गई है।
भागते अपराधियों पर लगेगी डिजिटल लगाम
कंट्रोल रूम के रेडियो निरीक्षक मनीष राय के अनुसार, अपराध कर फरार होने वाले आरोपी अक्सर वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में एएनपीआर कैमरे वाहन की नंबर प्लेट पढ़कर अपराधियों की लोकेशन ट्रैक करने में बेहद कारगर साबित होते हैं। इससे पुलिस की प्रतिक्रिया समय भी तेज होगी।
इन क्षेत्रों में पहले से सक्रिय हैं एएनपीआर कैमरे
शहर के कई संवेदनशील और व्यस्त इलाकों में एएनपीआर कैमरे पहले से लगाए जा चुके हैं। इनमें रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, रामपुर चौक, झंडा चौक, ग्वारीघाट, खमरिया, पनागर, माढ़ोताल तिराहा, गौर तिराहा और तिलवारा शामिल हैं।
स्मार्ट निगरानी से सुरक्षित जबलपुर की ओर
पुलिस प्रशासन का दावा है कि सीसीटीवी नेटवर्क के व्यापक विस्तार से अपराधियों की पहचान, महिला सुरक्षा और यातायात नियंत्रण को नई मजबूती मिलेगी। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद जबलपुर को डिजिटल निगरानी आधारित सुरक्षित शहर बनाने की दिशा में इसे बड़ा कदम माना जा रहा है।








