जबलपुर में चेक बाउंस के पाँच मामलों में जिम संचालिका को छह माह की सजा और जुर्माना
जबलपुर,यशभारत।

जबलपुर में चेक बाउंस के पाँच मामलों में जिम संचालिका को छह माह की सजा और जुर्माना
जबलपुर,यशभारत। मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित न्यायालय ने चेक अनादर के पाँच अलग-अलग प्रकरणों में एक महिला जिम संचालिका को दोषी करार देते हुए प्रत्येक मामले में छह-छह माह के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी डॉ. गौरव गर्ग की अदालत ने साक्ष्यों और दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर 10 फरवरी 2026 को यह फैसला सुनाया। अदालत ने कारावास के साथ-साथ विभिन्न प्रकरणों में प्रतिकार राशि अदा करने का भी आदेश दिया है।
मामले के अनुसार, भवरताल गार्डन के सामने नेपियर टाउन निवासी अतुल अग्रवाल ने शक्ति नगर निवासी सपना चड्डा के विरुद्ध परिवाद प्रस्तुत किया था। सपना चड्डा ‘बॉडी लाइन जिम’ की संचालिका हैं। परिवादी के अनुसार, दोनों के बीच व्यावसायिक लेन-देन हुआ था, जिसके अंतर्गत अभियुक्ता द्वारा कुछ चेक दिए गए थे। जब इन चेकों को बैंक में प्रस्तुत किया गया, तो वे अपर्याप्त धनराशि के कारण अनादरित होकर लौट आए।
चेक अनादरित होने के पश्चात परिवादी ने अपने अधिवक्ता सुनील विश्वकर्मा के माध्यम से विधिक नोटिस प्रेषित किए। नोटिस की अवधि पूर्ण होने के बाद भी भुगतान न होने पर परिवादी ने न्यायालय की शरण ली। अदालत में सुनवाई के दौरान परिवादी की ओर से विवादित चेक, बैंक रिटर्न मेमो, विधिक नोटिस की प्रतिलिपि तथा अन्य संबंधित दस्तावेज साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए गए।
न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और अभिलेखों का परीक्षण करने के उपरांत यह पाया कि अभियुक्ता द्वारा परकाम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 का उल्लंघन किया गया है। अदालत ने पाँच अलग-अलग मामलों—क्रमांक 418/2021, 1437/2021, 1463/2021, 419/2021 तथा 1464/2021—में सपना चड्डा को दोषी ठहराया। प्रत्येक मामले में छह माह के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है।
सजा के अतिरिक्त अदालत ने प्रतिकार राशि अदा करने का भी आदेश दिया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एक मामले में 52,200 रुपये, दूसरे में 2,14,000 रुपये,तीसरे में 52,500 रुपये, चौथे में 52,000 रुपये एवं पाँचवे में 56,000 रुपये की राशि अदा करने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्णय सुनाते समय अदालत ने कहा कि व्यावसायिक लेन-देन में पारदर्शिता और विश्वास अत्यंत आवश्यक है तथा चेक जैसे विधिक साधन का दुरुपयोग न्याय व्यवस्था के प्रति गंभीर अवमानना है। अदालत ने स्पष्ट किया कि धारा 138 के प्रावधानों का उद्देश्य लेन-देन में विश्वसनीयता बनाए रखना है और इसके उल्लंघन पर कठोर दंड का प्रावधान इसी कारण किया गया है।
फैसला सुनाए जाने के बाद न्यायालय ने अभियुक्ता को न्यायिक अभिरक्षा में लेने के निर्देश दिए तथा सजा वारंट जारी कर जबलपुर केंद्रीय जेल भेजने का आदेश पारित किया। न्यायालय ने डिजिटल हस्ताक्षर के साथ आदेश पारित करते हुए प्रकरणों का निस्तारण कर दिया।
परिवादी पक्ष के अधिवक्ता ने इस निर्णय को न्याय की जीत बताया है। उनका कहना है कि यह फैसला व्यापारिक लेन-देन में ईमानदारी और कानूनी दायित्वों के पालन के महत्व को रेखांकित करता है। वहीं बचाव पक्ष के पास इस निर्णय के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील करने का विधिक विकल्प उपलब्ध है।
शहर के व्यापारिक वर्ग में इस फैसले को लेकर चर्चा देखी जा रही है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि चेक अनादर के मामलों में न्यायालय का यह रुख एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि आर्थिक दायित्वों की अनदेखी को हल्के में नहीं लिया जाएगा। परकाम्य लिखत अधिनियम के तहत चेक अनादर के मामलों में समयबद्ध कार्रवाई और कठोर दंड व्यवस्था का उद्देश्य व्यावसायिक विश्वास को सुदृढ़ करना है।
ध्यान देने योग्य है कि धारा 138 के अंतर्गत अपराध सिद्ध होने पर कारावास और जुर्माना दोनों का प्रावधान है। न्यायालय ने इस मामले में साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध मानते हुए कारावास और प्रतिकार राशि दोनों का आदेश पारित किया। इस फैसले को स्थानीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण कानूनी उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
फिलहाल, बचाव पक्ष द्वारा आगे की कानूनी रणनीति पर विचार किया जा रहा है। यदि उच्च न्यायालय में अपील दायर की जाती है, तो मामले की अगली सुनवाई वहां होगी। तब तक निचली अदालत का यह निर्णय प्रभावी रहेगा।







