ईरान-इजरायल तनाव से बढ़ी चिंता: महंगा तेल, दबाव में बाजार… भारत पर कितना असर?
सोने की कीमतों में तेजी संभव

नई दिल्ली,एजेंसी। वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले ही टैरिफ वॉर और सुस्ती के दौर से जूझ रही थी, ऐसे में मिडिल ईस्ट में Iran और Israel के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। यदि हालात पूर्ण युद्ध में बदलते हैं, तो इसका असर भारत सहित कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर दिखाई दे सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की आशंका
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर सप्लाई पर पड़ता है। यदि ईरान Strait of Hormuz में आवाजाही प्रभावित करता है, तो कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकता है। फिलहाल कीमतें करीब 67 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हैं और हालिया सत्र में लगभग 2% बढ़त दर्ज की गई है।
तेल महंगा होने का मतलब है—ढुलाई महंगी, उत्पादन लागत अधिक और अंततः रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम में बढ़ोतरी। इसका सीधा असर आम आदमी की रसोई और बजट पर पड़ सकता है।
शेयर बाजार में बढ़ सकती है अस्थिरता
युद्ध जैसी स्थितियां बाजार को अस्थिर बनाती हैं। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक जोखिम कम करने के लिए उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश विकल्प—जैसे डॉलर या सोना—की ओर रुख कर सकते हैं। इसका असर BSE Sensex और Nifty 50 जैसे प्रमुख सूचकांकों पर दबाव के रूप में दिख सकता है। बैंकिंग, आईटी और पेंट सेक्टर के शेयरों में उतार-चढ़ाव बढ़ने की संभावना है।
सोने की कीमतों में तेजी संभव
वैश्विक अनिश्चितता के दौर में निवेशक सोने को सुरक्षित विकल्प मानते हैं। यदि तनाव बढ़ता है, तो भारत में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक जा सकती हैं। साथ ही, डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आने पर आयातित सोना और महंगा हो सकता है, जिससे खुदरा बाजार में कीमतें और बढ़ेंगी।
भारत की स्थिति कितनी मजबूत?
चुनौतियों के बावजूद भारत की स्थिति पूरी तरह कमजोर नहीं है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार फिलहाल मजबूत है, जिससे सरकार और Reserve Bank of India के पास बाजार में स्थिरता बनाए रखने के पर्याप्त साधन हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को घबराहट में फैसले लेने से बचना चाहिए। युद्ध या तनाव की खबरों के बीच बाजार में अस्थिरता स्वाभाविक है, लेकिन दीर्घकालिक निवेश रणनीति पर कायम रहना अधिक समझदारी भरा कदम हो सकता है।







