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अंदरूनी- राजनीति भोपाल कार्यक्रम के पहले पार्टी में जमकर सियासत ग्वालियर की पुनरावृति जबलपुर में खुल कर हुई गुटबाजी

अंदरूनी- राजनीति भोपाल कार्यक्रम के पहले पार्टी में जमकर सियासत
ग्वालियर की पुनरावृति जबलपुर में खुल कर हुई गुटबाजी
क्या कांग्रेस में मंच का सम्मान वापिस होगा

जबलपुर यश भारत। 3 जून को भोपाल में कांग्रेस की रैली होने जा रही है। जिसमें राहुल गांधी भी मौजूद होंगे लेकिन इसके पहले ग्वालियर और जबलपुर में हुई रैलियों के दौरान गुटबाजी और अनुशासनहीनता ने कांग्रेस को परेशान करके रखा है। एक तरफ जहां ग्वालियर मैं मंच पर चढऩे की होड़ दिखाई दी। जिसके बाद दिग्विजय सिंग मंच पर जाने से साफ इनकार कर दिया और फिर वही हालत जबलपुर में भी देखने को मिला जहां दिग्विजय से मंच पर नहीं गए। लेकिन नेताओं ने इससे कोई भी सीख नहीं ली। अब देखना होगा कि भोपाल में हो रहा कांग्रेस के के राहुल गांधी की उपस्थित में हो रही मैराथन बैठकों में क्या कांग्रेस की  गुटबाजी बढेगी या घटेगी या इसके अलावा यह भी गौर करने वाली बात रहेगी कि क्या  मंच का सम्मान वापिस आयेगा।
जबलपुर में आयोजित हुई इस सभा की तुलना ग्वालियर में अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह में आयोजित हुई कांग्रेस पार्टी की संविधान बचाओ अभियान की शुरुआत के पहले आयोजित हुई सभा से जोड़कर देख रहे हैं। जिस तरह शहर में आयोजित हुई जय हिंद सभा की शुरुआती तैयारी से ही जोर-जोर से यह प्रचार प्रसार किया गया कि इसमें कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आएंगे लेकिन कुछ दिनों के बाद प्रियंका गांधी का नाम आगे आ गया और दावा किया जाने लगा कि आयोजन में वे जरूर शिरकत करेंगी लेकिन आयोजन के एक दिन पहले तक उनके आने को लेकर अनिश्चितता बनी रही। और ठीक है एक दिन पहले शाम को कांग्रेस नेताओं ने एक पत्रकार वार्ता आयोजित कर यह जानकारी दी की प्रियंका गांधी नहीं आ रही है। ठीक ऐसा ही कुछ ग्वालियर में भी हुआ था। 28 अप्रैल को ग्वालियर में संविधान बचाओ अभियान की शुरुआत के मौके पर आयोजित होने वाली सभा में भी राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के आने तक के दावे किए गए थे उसे समय भी कांग्रेस जनों ने काफी प्रचार प्रसार किया था लेकिन अंतिम समय में इनमें से कोई भी नेता ग्वालियर नहीं पहुंचा और बाद में कांग्रेस के दूसरे नेताओं नहीं ग्वालियर में आयोजित सभा को संबोधित किया। और ऐसा ही कुछ जबलपुर में भी हुआ है इसलिए लोग तुलना भी कर रहे हैं।
इसलिए मंच पर नहीं बैठे दिग्विजय सिंह
शहर में आयोजित जय हिंद सभा में शामिल होने आये पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का मंच पर ना बैठना काफी चर्चाओं में है लेकिन इसके पीछे ग्वालियर की वह सभा ही है जिसका उल्लेख ऊपर किया गया है। सूत्रों की माने तो ग्वालियर में आयोजित सभा के दौरान मंच पर बैठने को लेकर नेताओं में होड लगी थी और जिस तरह धक्का मुक्की और अव्यवस्था का माहौल निर्मित हुआ उसके दिग्विजय सिंह काफी रुष्ट नजर आये और उसी दिन उन्होंने यह घोषणा कर दी थी कि आगामी किसी भी कार्यक्रम में वह मंच पर ना बैठकर आम कार्यकर्ता की तरह मंच से बाहर बैठेंगे लेकिन सभा को संबोधित जरूर करेंगे और अपनी इसी पूर्व घोषणा के मुताबिक जबलपुर में भी दिग्विजय सिंह की काफी मनाया गया कि वे मंच पर बैठे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और बाद में सभा को भी संबोधित किया।
पूर्व विधायक पुत्र भी रहे चर्चाओं में 
आयोजन के दौरान बरगी विधानसभा से पूर्व विधायक रहे संजय यादव का पुत्र समर्थ यादव बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के साथ आयोजन स्थल पर पहुंचा था। एक तरफ जहां लोगों में मंच पर बैठने के लिए होड लगी रही तो दूसरी तरफ समर्थ अपने साथियों के साथ एक आम कार्यकर्ता की तरह मंच के सामने बैठे नजर आए और लोगों का ध्यान भी उन पर  गया और उनका यही अंदाज चर्चा का विषय भी बन गया।
बैनर पोस्टरो को लेकर चर्चा       
इस आयोजन को लेकर शहर में एक चर्चा इस बात को लेकर भी है कि कांग्रेस का यह पूरा आयोजन सेना के सम्मान पराक्रम को लेकर आयोजित किया गया था जिसमें बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक भी शामिल हुए लेकिन मंच के माध्यम से ज्यादातर नेताओं ने कर्नल सोफिया और विंग कमांडर व्योमिक सिंह के खिलाफ भाजपा नेताओं के द्वारा की गई अपमानजनक बयानबाजी का उल्लेख कर इसी सेना का अपमान तो बताया लेकिन पूरे आयोजन के दौरान शहर को जिस तरह से बैनर पोस्टरो से शहर को पाट दिया गया उन बैनर पोस्टरो में और ना ही कार्यक्रम स्थल पर इन महिला सैन्य अधिकारियों की एक तस्वीर तक नजर नहीं आई। ऐसी में लोग तो चर्चा करेंगे ही कि यह कैसा सम्मान है।  
बड़े नेताओं की उपस्थिति रही संतोषजनक
यदि शहर में आयोजित हुई जय हिंद सभा में शामिल होने का आये नेताओं की बात की जाए तो पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह कमलनाथ के साथ ही छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पूर्व कैबिनेट मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया अरुण यादव प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार राज्यसभा सांसद विवेक तंखा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामेश्वर नीखरा आदि का एक साथ कार्यक्रम में मौजूद रहना उल्लेखनीय कहा जा सकता है। लंबे समय के बाद शहर में कोई ऐसा कार्यक्रम आयोजित हुआ जिसमें इतनी बड़ी संख्या में वरिष्ठ नेता एक साथ शामिल हुए। यदि इसलिए इस लिहाज से देखा जाए तो आयोजकों की यह बडी सफलता है अब यह अलग बात है कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के ना आने से कुछ निराशा जरूर हुई लेकिन कार्यकर्ताओं के उत्साह में कोई कमी नहीं रही इसीलिए कांग्रेस इस आयोजन को सफल बता रही है।

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