इंदौर दूषित पानी कांड: हाईकोर्ट सख्त, नगर निगम अधिकारियों को नोटिस जारी

इंदौर दूषित पानी कांड: हाईकोर्ट सख्त, नगर निगम अधिकारियों को नोटिस जारी
इंदौर, यशभारत। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में हुए भीषण दूषित पानी कांड ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। इस मामले में दायर तीन जनहित याचिकाओं (PIL) पर सुनवाई करते हुए इंदौर हाईकोर्ट ने नगर निगम के अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी को नियत की गई है।
आंकड़ों को लेकर छिड़ी रार: कोर्ट में गलत जानकारी देने का आरोप
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने नगर निगम पर आंकड़ों की बाजीगरी करने का गंभीर आरोप लगाया है। अधिवक्ता एवं याचिकाकर्ता रितेश हिरानी ने कोर्ट को बताया कि नगर निगम की ओर से पेश किए गए मरीजों और मृतकों के आंकड़े जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं।
याचिकाकर्ता का दावा: दूषित पानी के कारण अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है और 1400 से अधिक लोग संक्रमण का शिकार होकर इलाज करा रहे हैं।
नगर निगम का पक्ष: याचिकाकर्ताओं के अनुसार, निगम ने कोर्ट में जो डेटा दिया है वह वास्तविक संख्या से काफी कम है, जिसे लेकर कोर्ट में आपत्ति दर्ज कराई गई है।
जिम्मेदारों पर FIR की मांग
जनहित याचिका में मांग की गई है कि इस लापरवाही के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार नगर निगम के अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए। याचिका में यह भी पूछा गया है कि घटना के बाद से अब तक प्रशासन ने क्या ठोस कदम उठाए हैं और दोषियों पर क्या कार्रवाई की गई है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
भागीरथपुरा की इस घटना ने न केवल इंदौर बल्कि पूरे प्रदेश की सियासत को गरमा दिया है। एक तरफ जहां विपक्ष सरकार और प्रशासन को घेर रहा है, वहीं दूसरी तरफ हाईकोर्ट की सख्ती ने निगम अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
अगली सुनवाई: अब सभी की नजरें 6 जनवरी को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां नगर निगम को अपना पक्ष रखना होगा और कोर्ट मौत के सही आंकड़ों और कार्रवाई की समीक्षा करेगा।







