
मीरा-भाईंदर में 1 अप्रैल से नई संपत्तियों पर बढ़ा संपत्ति कर लागू
आवासीय पर 44 प्रतिशत, व्यावसायिक पर 50 प्रतिशत तक वृद्धि
यशभारत। मीरा-भाईंदर महानगरपालिका क्षेत्र में 1 अप्रैल, 2026 से नई संपत्तियों पर बढ़े हुए कर लागू किए जाएंगे। पालिका की पहली महासभा में पारित प्रस्ताव के अनुसार नई आवासीय संपत्तियों पर लगभग 44 प्रतिशत तथा नई व्यावसायिक संपत्तियों पर 50 प्रतिशत तक अधिक कर देना होगा। हालांकि, यह वृद्धि केवल नई संपत्तियों पर लागू होगी, जबकि पुरानी संपत्तियों को इससे बाहर रखा गया है।
नई संपत्तियों पर बढ़ेगा कर बोझ
पालिका प्रशासन ने शहर की आय बढ़ाने के उद्देश्य से संपत्ति कर दरों की पुनर्गणना का प्रस्ताव रखा था। इसके तहत किरायानामा आधारित कर निर्धारण प्रणाली में संशोधन कर नए दरों को मंजूरी दी गई। इस निर्णय के बाद नई व्यावसायिक इकाइयों और गैर-आवासीय संपत्तियों पर कर भार बढ़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
पुराने और नए में भेदभाव की आशंका
1 अप्रैल से कर दायरे में आनेवाली नई संपत्तियों पर प्रति वर्ग फुट के आधार पर कर लिया जाएगा। नई व्यावसायिक संपत्तियों पर वर्तमान दरों की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत अधिक कर देना होगा। इससे नए संपत्ति धारकों पर अधिक वित्तीय बोझ पड़ेगा और पुराने तथा नए मालिकों के बीच असमानता की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका जताई जा रही है।
किरायानामों में गड़बड़ी से राजस्व नुकसान
महासभा में यह मुद्दा भी उठाया गया कि किराये पर दी गई संपत्तियों के डुप्लिकेट करारनामे प्रस्तुत किए जाने से पालिका को राजस्व हानि होती है। महापौर डिंपल मेहता के मुताबिक, वास्तविक कर वसूली सुनिश्चित करने के लिए संबंधित व्यावसायिक संपत्तियों के पंजीकृत किरायानामे प्रस्तुत करने हेतु उप-निबंधक कार्यालय को पत्र भेजा गया है।
1 अप्रैल के बाद फ्लैट पंजीकरण महंगा पड़ेगा
शहर में बड़े पैमाने पर नई इमारतों का निर्माण जारी है। जिन फ्लैटों की खरीद हो चुकी है, लेकिन पंजीकरण लंबित है, उनके करारनामे यदि 1 अप्रैल के बाद होते हैं तो उन्हें नई संपत्ति मानकर बढ़े हुए कर का भुगतान करना होगा।
नए खरीदारों पर अतिरिक्त बोझ
नई आवासीय संपत्ति खरीदने की योजना बना रहे लोगों को अब बढ़े हुए कर को ध्यान में रखकर निर्णय लेना होगा। बढ़ी हुई दरों का सबसे अधिक असर नए गृहस्वामियों पर पड़ेगा।
इस निर्णय का कुछ जनप्रतिनिधियों ने विरोध भी किया है। बढ़े हुए करों का विरोध करते हुए इसे नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताया।







