
वेलेंटाइन डे पर कैसे बदल जाती है गुलाब की कीमत?
किसान से प्रेमी तक कीमतों में खेल और असली वजहें
मुंबई, यश भारत । वेलेंटाइन वीक के दौरान मुंबई ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में फूलों खासतौर पर गुलाब की मांग तेजी से बढ़ जाती है। इस बढ़ी हुई मांग के चलते गुलाब की कीमतें आम दिनों की तुलना में कई गुना तक पहुँच जाती हैं। इसका असर खेतों से लेकर थोक मंडियों और खुदरा बाजारों तक साफ दिखाई देता है।
भारत में गुलाब की खेती उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र और बंगाल जैसे कई राज्यों में की जाती है। अन्य फसलों की तरह गुलाब की खेती का खर्च भी मौसम, पानी, उर्वरक और श्रम पर निर्भर करता है। सामान्य दिनों में एक गुलाब की थोक कीमत अपेक्षाकृत कम रहती है, लेकिन वेलेंटाइन डे के आसपास मांग बढ़ने के कारण थोक बाजार में इसके भाव असामान्य रूप से ऊपर चले जाते हैं।
कई बाजारों में देखा गया है कि आम दिनों में गुलाब की थोक कीमत ₹20 से ₹50 प्रति फूल रहती है, जबकि वेलेंटाइन वीक में यही फूल ₹70 से ₹120 तक बिकने लगता है। गुलाब दादर जैसी प्रमुख थोक फूल मंडियों में पहुंचते हैं, जहां किसान अपने फूल बड़े व्यापारियों को बेचते हैं और फूल विक्रेता इन्हें बड़ी मात्रा में खरीदते हैं। वेलेंटाइन वीक के दौरान यहाँ व्यापार का दबाव इतना अधिक हो जाता है कि रोज़ाना लाखों रुपये के फूल मंडी में खप जाते हैं।
विश्लेषण में यह भी सामने आया है कि 20 गुलाबों के एक बंडल की थोक कीमत ₹350 से ₹400 तक पहुंच चुकी है, जबकि खुदरा बाजार में प्रति फूल की कीमत ₹30 या उससे अधिक हो जाती है। मांग बढ़ने के कारण खुदरा स्तर पर गुलाब के दाम और चढ़ जाते हैं। उदाहरण के तौर पर, 20 गुलाबों वाले एक गुलदस्ते की कीमत ₹300 से ₹500 तक पहुँच सकती है। कुछ स्थानों पर यह ₹700–₹800 तक भी पाई गई है। वहीं, छोटी दुकानों पर एक अकेला गुलाब ₹20 से लेकर ₹50 तक बिकता देखा गया है।






