सतना। थैलेसीमिया से पीड़ित पांच बच्चों को ब्लड ट्रांसफ्यूजन के जरिए HIV संक्रमण होने के मामले में जिला स्तरीय जांच पूरी कर ली गई है। प्रभारी सीएमएचओ डॉ. मनोज शुक्ला द्वारा गठित तीन सदस्यीय जिला जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दी है। रिपोर्ट में माना गया है कि बच्चों में HIV संक्रमण किसी न किसी डोनर के ब्लड के माध्यम से पहुंचा है। इसके साथ ही टीम ने सभी संबंधित डोनरों को एक-एक कर ट्रेस करने की सिफारिश की है।
जांच टीम में शिशुरोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप द्विवेदी (प्रभारी थैलेसीमिया व सिकलसेल), पैथोलॉजिस्ट डॉ. देवेन्द्र पटेल और सहायक प्रबंधक डॉ. धीरेन्द्र वर्मा शामिल थे। टीम ने ब्लड ट्रांसफ्यूजन की पूरी प्रक्रिया, स्क्रीनिंग और उपलब्ध रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की। खास बात यह रही कि जांच टीम में ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. देवेन्द्र पटेल भी शामिल थे।
इधर, बुधवार को केंद्र सरकार की टीम ने भी जिला अस्पताल पहुंचकर जांच शुरू कर दी, जबकि गुरुवार को स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के निर्देश पर गठित राज्य स्तरीय छह सदस्यीय जांच टीम सतना पहुंच गई है। इस टीम में रीवा संभाग के क्षेत्रीय स्वास्थ्य संचालक डॉ. एसबी अवधिया, एसबीटीसी/ब्लड सेल की डिप्टी डायरेक्टर डॉ. रूबी खान, एम्स भोपाल के ब्लड ट्रांसफ्यूजन विशेषज्ञ डॉ. रोमेश जैन, भोपाल ब्लड सेंटर की डॉ. सीमा नवेद, सीनियर ड्रग इंस्पेक्टर संजीव जादोन और डीआई प्रियंका चौबे शामिल हैं।
मामले में सीएमएचओ ने आईसीटीसी काउंसलर नीरज सिंह तिवारी को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है। बताया गया है कि करीब नौ महीने पहले पांच बच्चे HIV पॉजिटिव पाए गए थे, लेकिन इसकी जानकारी समय रहते सीएमएचओ को नहीं दी गई। इसी लापरवाही को लेकर जवाब तलब किया गया है।
ब्लड बैंक की कम्पोनेंट प्रक्रिया भी जांच के दायरे में है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में होल ब्लड से पैकसेल, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स अलग किए जाते हैं। थैलेसीमिया मरीजों को पैकसेल दिया जाता है। जांच में सामने आया है कि संक्रमित बच्चों के लिए उपयोग किए गए पैकसेल करीब 200 डोनरों के होल ब्लड से तैयार किए गए थे। शेष प्लाज्मा को राज्य सरकार से अनुबंधित एजेंसी खरीदती है, जो अत्याधुनिक मशीनों से त्रिस्तरीय जांच करती है। अब यह भी जांचा जा रहा है कि कहीं संक्रमण का स्रोत प्लेटलेट्स तो नहीं रहे।
फिलहाल इस संवेदनशील मामले में जिला, राज्य और केंद्र—तीन स्तर पर जांच चल रही है। ब्लड संग्रहण, स्क्रीनिंग, स्टोरेज और वितरण से जुड़े सभी रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि लापरवाही कहां और किस स्तर पर हुई।