सरकारी वेयरहाउस में अनाज घोटाला,1,900 क्विंटल से अधिक मूंग-उड़द गायब
कलेक्टर दीपक सक्सेना ने संदिग्ध खरीदी का भुगतान रोकने का दिया निर्देश

जबलपुर यशभारत। सरकारी उपार्जन केंद्रों पर किसानों से खरीदे गए अनाज में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। जबलपुर के मजीठा स्थित एमएलटी वेयरहाउस में जाँच के दौरान ऑनलाइन रिकॉर्ड और मौके पर मौजूद स्टॉक में भारी अंतर पाया गया। जाँच में सामने आया है कि इस वेयरहाउस से 1,671 क्विंटल मूंग और 253 क्विंटल उड़द गायब है, जिसकी कुल मात्रा 1,924 क्विंटल से अधिक है। इस गंभीर अनियमितता के बाद कलेक्टर दीपक सक्सेना ने संदिग्ध खरीदी का भुगतान रोकने का निर्देश दिया है।
लाखों का अनाज गायब, ऑनलाइन रिकॉर्ड में हेरफेर
इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब मूंग और उड़द की खरीदी में अनियमितताओं की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों के बाद कलेक्टर ने शहपुरा के अनुविभागीय राजस्व अधिकारी के नेतृत्व में एक जिला स्तरीय जाँच दल का गठन किया। उप संचालक कृषि डॉ. एस.के. निगम से मिली जानकारी के अनुसार, यह उपार्जन केंद्र सेवा सहकारी संस्था बसेड़ी द्वारा संचालित किया जा रहा था।
संस्था ने ऑनलाइन रिकॉर्ड में 12,928 क्विंटल मूंग और 8,736 क्विंटल उड़द की खरीदी दर्ज की थी। लेकिन, जब जाँच दल ने वेयरहाउस का भौतिक निरीक्षण किया, तो उन्हें केवल 11,257 क्विंटल मूंग और 8,434 क्विंटल उड़द ही मिली। यह अंतर बताता है कि ऑनलाइन रिकॉर्ड में हेरफेर करके लाखों रुपये के अनाज का गबन किया गया है।
पोर्टल पर स्टॉक की एंट्री ही नहीं
जाँच में चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई कि वेयरहाउस में फर्श पर रखा हुआ 324 क्विंटल मूंग और 285.5 क्विंटल उड़द का स्टॉक मौजूद था, लेकिन उसकी एंट्री पोर्टल पर नहीं की गई थी। इसके अलावा, 237 क्विंटल मूंग और 76 क्विंटल उड़द भी मौके पर स्टेक (ढेर) में लगी मिली, जिसकी भी कोई ऑनलाइन जानकारी नहीं थी। यह दर्शाता है कि यह हेराफेरी एक संगठित तरीके से की गई थी।
इस बड़े घोटाले के सामने आने के बाद, कलेक्टर ने तुरंत संदिग्ध खरीदी का भुगतान रोकने का आदेश दिया है। हालाँकि, उन्होंने उन किसानों को भुगतान करने का निर्देश दिया है जिनकी खरीदी में कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई है, ताकि ईमानदार किसानों को नुकसान न हो। जाँच रिपोर्ट के आधार पर 315 किसानों को मूंग और 243 किसानों को उड़द का भुगतान किया जाएगा। इससे पहले भी 68 किसानों को ₹1.52 करोड़ और 47 किसानों को ₹1.07 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है।
इस घटना ने सरकारी उपार्जन केंद्रों पर चल रहे भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया है और यह दर्शाया है कि कैसे जिम्मेदार अधिकारी और संस्थाएं मिलकर किसानों के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग कर रही हैं। प्रशासन को इस मामले में कड़ी कार्रवाई करनी होगी ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोका जा सके।







