रेलवे की ‘पिंक बुक’ का फॉरमैट बदला
अधिकारियों को समझने में भी छूट रहा पसीने

रेलवे की ‘पिंक बुक’ का फॉरमैट बदला
अधिकारियों को समझने में भी छूट रहा पसीने
जबलपुर यशभारत ।रेलवे में विकास कार्यों और योजनाओं का लेखा-जोखा समझने के लिए अब तक सबसे भरोसेमंद दस्तावेज मानी जाने वाली ‘पिंक बुक’ का फॉरमैट इस साल बदल दिया गया है। इस संबंध में जब संबंधित अधिकारियों से कुछ जानकारियां मांगी गई तो उन्होंने भी इस संबंध में कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। बता दें कि इस नई व्यवस्था ने पश्चिम मध्य रेल के अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। क्योंकि इसमें योजनाओं का विवरण इतना उलझा हुआ है कि अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि किस योजना के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई है और कितना बजट अब तक खर्च किया जा चुका है। इस संबंध में रेलवे सूत्रों ने बताया कि हर साल रेलवे मंडलों में पिंक बुक आते ही अधिकारियों को स्पष्ट जानकारी मिल जाती थी कि किस कार्य के लिए कितना पैसा स्वीकृत हुआ है और उसकी प्रगति किस स्तर पर है। वहीं पुराने फॉरमैट में योजनाओं के नाम आवंटित राशि और व्यय का ब्योरा साफ-साफ दर्ज होता था। मगर इस बार फॉरमैट में बदलाव कर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक नई पिंक बुक में प्रावधान इतने तकनीकी और जटिल बनाए गए हैं कि स्थानीय स्तर पर अधिकारी भी पूरी तरह से समझ नहीं पा रहे।
बदलाव से कार्यों में पड़ रहा असर
सूत्रों के मुताबिक पिंक बुक इस बदलाव का सीधा असर विकास कार्यों पर पड़ रहा है। कई परियोजनाओं के टेंडर और क्रियान्वयन में देरी हो रही है क्योंकि विभाग को यह तक स्पष्ट नहीं कि कौन सी परियोजना को कितनी प्राथमिकता दी जानी है और उसमें कितनी धनराशि वास्तव में उपलब्ध है। इससे न केवल काम की रफ्तार धीमी पड़ी है बल्कि पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
पिंक बुक बजट का आईना रही है
वहीं पिंक बुक को लेकर रेलवे कर्मचारियों और अधिकारियों का मानना है कि पिंक बुक हमेशा से बजट और योजनाओं का आईना रही है। आम तौर पर जनता और जनप्रतिनिधि भी इसी के आधार पर रेलवे के कामकाज की दिशा और प्राथमिकताएं समझ पाते थे। मगर नए बदलाव ने भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।
यह जानकारी रहती है पिंक बुक
भारतीय रेलवे में “पिंक बुक” एक वार्षिक प्रकाशन है जो एक वित्तीय वर्ष के लिए भारतीय रेलवे की वित्तीय योजना, भौतिक लक्ष्यों और अपेक्षित परिणामों को विस्तार से बताता है। साथ ही यह एक ऐसा दस्तावेज है जो रेलवे की परियोजनाओं, आवंटन और निवेश योजनाओं की समीक्षा करने में मदद करता है, जिससे वित्तीय योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही आती है।↵







