प्राकृतिक आवास में छोड़े जाएंगे 5 दुर्लभ गिद्ध, सेटेलाइट से होगी निगरानी

प्राकृतिक आवास में छोड़े जाएंगे 5 दुर्लभ गिद्ध, सेटेलाइट से होगी निगरानी
भोपाल, यश भारत। मध्यप्रदेश में गिद्ध संरक्षण की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है। रायसेन जिले के हलाली डैम वनक्षेत्र में 1 सिनेरियस गिद्ध और 4 गंभीर रूप से संकटग्रस्त लंबी चोंच वाले (भारतीय) गिद्धों को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा। यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में होगा।
जानकारी के मुताबिक इन गिद्धों को वर्ष 2025 के दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों से बचाव कर सुरक्षित लाया गया था। गंभीर अवस्था में मिलने के बाद इन्हें उपचार और पुनर्वास के लिए भोपाल स्थित वन विहार राष्ट्रीय उद्यान लाया गया। यहां स्थित गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र में विशेषज्ञों की देखरेख में इनका इलाज और स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
सूत्रों के अनुसार उपचार अवधि में गिद्धों को संतुलित आहार, नियमित चिकित्सकीय जांच और उड़ान अभ्यास कराया गया। इस पूरी प्रक्रिया में बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (बीएनएचएस) के विशेषज्ञों ने तकनीकी मार्गदर्शन दिया। पूर्णतः स्वस्थ पाए जाने के बाद ही इन्हें जंगल में छोड़ने का निर्णय लिया गया।
सबसे महत्वपूर्ण पहल यह है कि इन सभी गिद्धों पर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और बीएनएचएस के सहयोग से उपग्रह आधारित संकेतक उपकरण लगाए गए हैं। इन उपकरणों की सहायता से वन विभाग उनकी उड़ान की दिशा, भोजन की तलाश और ठहराव स्थलों की निरंतर निगरानी कर सकेगा। किसी भी असामान्य गतिविधि की स्थिति में तत्काल बचाव दल सक्रिय किया जा सकेगा।
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि हलाली डैम का वनक्षेत्र गिद्धों के लिए अनुकूल प्राकृतिक वातावरण प्रदान करता है। यहां ऊंचे वृक्ष, खुला परिदृश्य और पर्याप्त भोजन उपलब्ध है, जो इनके सुरक्षित पुनर्वास के लिए उपयुक्त माना जाता है।
एक समय दवाओं के दुष्प्रभाव के कारण गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट आई थी, लेकिन अब संरक्षण प्रयासों के चलते स्थिति में सुधार देखा जा रहा है। प्रदेश में गिद्धों की संख्या में वृद्धि ने मध्यप्रदेश को गिद्ध राज्य के रूप में विशेष पहचान दिलाई है।







