हेडफोन के ज्यादा उपयोग से कम हो रही है सुनने की क्षमता
डॉक्टरों ने दी 60-60 प्रक्रिया अपनाने की सलाह

हेडफोन के ज्यादा उपयोग से कम हो रही है सुनने की क्षमता
डॉक्टरों ने दी 60-60 प्रक्रिया अपनाने की सलाह
मुंबई, यश भारत डिजिटल साधनों का बढ़ता उपयोग और इसके साथ हेडफोन-ईयरफोन का अत्यधिक इस्तेमाल युवाओं की सुनने की क्षमता पर असर डाल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार विशेष रूप से 20 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में कान से संबंधित विभिन्न समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
आज की डिजिटल जीवनशैली में कई युवा काम के दौरान, यात्रा करते समय या खाली समय में संगीत सुनने, गेम खेलने या ऑनलाइन सामग्री देखने के लिए घंटों तक ईयरफोन का उपयोग करते हैं। लगातार तेज आवाज के संपर्क में रहने के कारण कानों को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता। इससे कान के भीतर मौजूद संवेदनशील कोशिकाओं पर दबाव पड़ता है और सुनने की क्षमता कमजोर होने की संभावना बढ़ जाती है।
मुंबई के कान-नाक-गला विशेषज्ञ डॉ. अंकित जैन के अनुसार ईयरफोन आज की जीवनशैली का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसका लंबे समय तक और तेज आवाज में इस्तेमाल करने से सुनने की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। कान के अंदर मौजूद बेहद नाजुक संवेदी कोशिकाएं ध्वनि संकेतों को मस्तिष्क तक पहुंचाने का काम करती हैं। लगातार तेज आवाज के संपर्क में रहने से इन कोशिकाओं को नुकसान हो सकता है और एक बार क्षतिग्रस्त होने के बाद ये फिर से बनती नहीं हैं।
उनके अनुसार 20 से 30 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 60 प्रतिशत युवाओं में हेडफोन के लंबे उपयोग और तेज आवाज के कारण सुनने की क्षमता में कमी के शुरुआती लक्षण दिखाई देने लगे हैं। लगभग हर 10 में से 6 युवाओं में कानों में लगातार आवाज आना (टिनिटस), बातचीत स्पष्ट सुनाई न देना या मोबाइल-लैपटॉप की आवाज बार-बार बढ़ाने की आवश्यकता महसूस होना जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं।
नाक-कान-गला विशेषज्ञ डॉ. नेहा पंगम ने बताया कि वर्तमान में हर महीने 20 से 30 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 40 प्रतिशत युवाओं में श्रवण संबंधी समस्याओं के शुरुआती संकेत देखे जा रहे हैं। इनमें कानों में लगातार आवाज आना, भीड़ में ठीक से सुनाई न देना, लोगों से बार-बार बात दोहराने के लिए कहना, कानों में दबाव महसूस होना या फोन की आवाज लगातार बढ़ानी पड़ना जैसी समस्याएं शामिल हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार हेडफोन का उपयोग करते समय ’60-60 नियम’ अपनाना चाहिए। यानी आवाज की तीव्रता 60 प्रतिशत से कम रखें और लगातार 60 मिनट से अधिक समय तक हेडफोन का उपयोग न करें।







