जबलपुरमध्य प्रदेशराज्य

DIAL 112 – बूझो तो कप्तान ना जान पाए दरोगा

ऊपर भगवान नीचे कप्तान की कहावत पुलिस में आम है सिपाही से लेकर दरोगा नंबर कमाने का मौका नहीं गंवाता. कभी-कभी साहब के खास को छोटा कप्तान भी कहते हैं. छोटा कप्तान बनने की चाहत और उपकप्तानों को भी रहती है वर्तमान में कप्तान की कार्य प्रणाली से बूझो तो जाने की कहावत चरितार्थ हो रही है कभी-कभी मझौले कप्तान भी छोटे कप्तान बन जाते है.अभी तो थाना कप्तान से लेकर सत्ताधीश भी समझ नहीं पा रहे हैं कि कप्तान का अगला कदम क्या होगा .बस एक विधानसभा क्षेत्र में कप्तान बूझो तो जाने की स्थिति में नहीं है

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वहां पुरस्कार यहां फटकार

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कंट्रोल रूम के किनारे 4 पुलिस वाले आपस में बतिया रहे थे साहब बड़े गजब हैं समझ में नहीं आता कि उनके मन में क्या चल रहा है .हाल ही में पुरस्कृत होने वाले थाना कप्तान की क्राइम मीटिंग में कार्य प्रणाली को लेकर साहब आग बबूला हो गए तब पुलिस के दूसरे थाना कप्तान ने कहा की जब पुरस्कृत हुए तब चेहरे में खुशियां थी और साहब की फटकार के बाद खुशियां काफूर हो गई है तभी इसी बातचीत के सिलसिले मे एक और थाना कप्तान बोल पड़े की ” क्या पता कितने दिन किस थाने में दाना पानी लिखा है”

जाना था जापान पहुंच गए चीन

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हाल ही में थाना कप्तान के हुए तबादलों से चर्चाएं आम है कि किसका दाना पानी कितने दिन लिखा है यह समझ से परे है। इस सूची में एक नाम ऐसा था कि वह सोच रहे थे कि पहुंचेंगे शहर की सीमावर्ती थाना क्षेत्र और जा पहुंचे शहर के मध्य थाने में और जिनका इस मध्य थाने में मन लग गया था वह पहुंच गए एयरपोर्ट के पास वाले थाना क्षेत्र में। ऐसे में यह चर्चाएं होने लगी की सोचते कुछ हैं होता कुछ है और यह कहावत चरितार्थ हो गई की “जाना था जापान पहुंच गए चीन”

शिकायतों में मझौले कप्तान का नहीं लगता मन तो क्राइम मीटिंग में हो जाती है अलसेट

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नर्मदा तट से लगे एक थाना कप्तान को उस समय बगले झांकना पड़ता है जब भरी क्राइम मीटिंग में कप्तान द्वारा शिकायतों का निराकरण न करने से कप्तान की वाणी का प्रहार सुनना पड़ता है भले बाहर निकाल कर साहब यह दावा करते है हमने शराब और दारू की बड़ी कार्यवाई की है पर मीटिंग में कप्तान के सामने हांसलाई जीरो हो जाती है और शिकायतों का निराकरण न करने से मिल जाती है कप्तान की अलसेट..

नहीं जानते शहर वासी उपकप्तानों के नाम

कोई वक्त था जब शहर में कप्तान से ज्यादा उपकप्तानों का नाम होता था सामाजिक सरोकार मे कप्तानों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती थी जो अब नदारद है विशेष परिस्थितियों में ये उपकप्तान उल्लेखनीय रोल निभाया करते थे .वर्तमान में सिर्फ एक उप कप्तान की चर्चा है जो की बाकायदा सामाजिक सरोकार के साथ जीते हैं अन्य उप कप्तान कौन है इस बारे में शहर वासियों को कोई खबर तक नहीं है

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