मृत पार्टनर के वारिसों से धोखाधड़ी: फर्जी पार्टनरशिप डीड बनाकर करोड़ों की जमीन पर कब्जा, EOW ने दर्ज की FIR

मृत पार्टनर के वारिसों से धोखाधड़ी: फर्जी पार्टनरशिप डीड बनाकर करोड़ों की जमीन पर कब्जा, EOW ने दर्ज की FIR
पुराने स्टाम्प पेपर का दोबारा उपयोग कर बनाई बैकडेटेड डीड; विनोद और अनीता अग्रवाल पर शिकंजा
भोपाल, यशभारत। राजधानी के सनखेड़ी क्षेत्र में करोड़ों की जमीन हड़पने और मृत पार्टनर के उत्तराधिकारियों को व्यापार से बेदखल करने का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने भोपाल निवासी विनोद अग्रवाल और उनकी पत्नी अनीता अग्रवाल के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचना का मामला दर्ज किया है। आरोपियों ने वर्ष 2012 के पुराने इस्तेमाल किए जा चुके स्टाम्प पेपर का अवैध रूप से दोबारा उपयोग कर एक फर्जी पार्टनरशिप डीड तैयार की थी।
ऐसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा
प्रमिला अग्रवाल की शिकायत पर हुई जांच में सामने आया कि ग्राम सनखेड़ी स्थित 1.4 एकड़ भूमि वर्ष 2012 में खरीदी गई थी, जिसमें स्वर्गीय विजय अग्रवाल ने अपने बैंक खाते से भुगतान किया था। विजय अग्रवाल की 2017 में मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु के बाद आरोपी विनोद अग्रवाल ने अपनी पत्नी अनीता अग्रवाल के साथ मिलकर एक कूटरचित (फर्जी) पार्टनरशिप डीड तैयार की। इस डीड को वर्ष 2012 की तारीख में दिखाया गया ताकि यह साबित किया जा सके कि अनीता अग्रवाल शुरू से पार्टनर थीं और विजय अग्रवाल के वारिसों का इसमें कोई हक नहीं है।
स्टाम्प पेपर ने खोली पोल
EOW की जांच में सबसे चौंकाने वाला तथ्य स्टाम्प पेपर को लेकर आया। जांच में पाया गया कि डीड में प्रयुक्त स्टाम्प (H488523 व H488524) पहले ही देवीराम’ नामक व्यक्ति द्वारा किसी अन्य रजिस्ट्री के लिए खरीदे और उपयोग किए जा चुके थे। डीड पर तारीख 11 अप्रैल 2012 डाली गई, लेकिन उसका नोटरीकरण 2023 में हुआ और पंजीयन भी अक्टूबर 2023 में ई-साइन के जरिए कराया गया। आरोपियों ने स्टाम्प के पीछे न्यू ईरा इंफ्रास्ट्रक्चर लिखा, जबकि मूल फर्म का नाम ईरा इंफ्रास्ट्रक्चर था।
बिना वारिसों की सहमति के किया ज्वाइंट वेंचर
आरोपियों ने इस फर्जी डीड के आधार पर आदिनाथ कंस्ट्रक्शन्स’ के साथ एक MOU और ज्वाइंट वेंचर कर लिया। इस पूरी प्रक्रिया में स्वर्गीय विजय अग्रवाल के वैध उत्तराधिकारियों (पत्नी व बच्चों) से न तो सहमति ली गई और न ही उन्हें इसकी जानकारी दी गई।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
EOW ने आरोपियों के विरुद्ध धारा 420 (धोखाधड़ी) 467 (दस्तावेजों की कूटरचना), 468 (धोखाधड़ी के लिए जालसाजी) 471 (फर्जी दस्तावेज का असली के रूप में उपयोग) और 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया है। विभाग अब इस मामले में शामिल अन्य अज्ञात व्यक्तियों और सरकारी अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रहा है।






