भोपाल

मां को सौंपी 3 साल की मासूम की कस्टडी

मां को सौंपी 3 साल की मासूम की कस्टडी
पति ने पत्नी को गंभीर बीमारी से ग्रस्त बताकर मांगी थी बच्ची की कस्टड़ी, जांच कराई तो बच्ची की मां निकली स्वस्थ

भोपाल, यशभारत। राजधानी के गोविंदपुरा एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव ने एक मासूम बच्ची की कस्टडी से जुड़े एक प्रकरण में फैसला सुनाते हुए 3 साल की बच्ची की कस्टडी मां को सौंपी है। इस मामले में पति का दावा था कि उसकी पत्नी गंभीर बीमारी से ग्रस्त है, जिससे बच्ची सुरक्षित  नहीं रहेगी। जब पति के दावे के बाद उसकी पत्नी का हेल्थ चेकअप कराया गया तो महिला स्वस्थ निकली।
जानकारी के मुताबिक महिला ने आवेदन देते हुए बताया था कि 11 सितंबर 2019 में उसकी शादी हुई थी। इसके बाद साल 2021 में हेपेटाइटस बी नामक बीमारी होने के बारे में पता चला और 24 जून 2025 तक वह पति के घर में ही रही, लेकिन 25 जून 2025 को पति और सास ने उसे व बेटी को घर से निकाल दिया था। जिसकी रिपोर्ट अगस्त में थाने में की गई। जब मैं थाने में रिपोर्ट लिखवाने गई, तभी पति बेटी को जबर्दस्ती अपने साथ ले गया। महिला ने एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव से बच्ची की कस्टडी वापस दिलाए जाने की मांग की। इधर, पति ने कहा कि विवाह के बाद पत्नी गर्भवती हुई तो उसकी जांच कराई गई। जिसमें वह हैपेटाइटिस बी पॉजीटिव पाई गई। यह गंभीर बीमारी है, जो मां से बच्चे को हो जाती है। जन्म के समय बच्ची को हेपेटाइटिस बी का टीका लगवा दिया था, लेकिन हर छह महीने में उसका उपचार होता है।
पत्नी के वजह से हुआ संक्रमण-
पति ने आरोप लगाते हुए बताया कि पत्नी की वजह से मुझे भी संक्रमण हो चुका है। इसलिए पत्नी और मेरा आपसी सहमति से तलाक लेने का निर्णय हुआ था और बच्ची की देख-रेख दोनों साथ में करेंगे। जब मैं बच्ची को लेकर ससुराल गया तो पत्नी के परिजनों ने मारपीट की और थाने में केस दर्ज करवा दिया। पत्नी ने मां के विरुद्ध भी झूठा केस दर्ज कराया।
जिला अस्पताल में कराया हेल्थ चेकअप:-
एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद जिला चिकित्सालय जेपी अस्पताल में महिला का स्वास्थ्य परीक्षण कराया। जांच में सामने आया कि वर्तमान में महिला को इलाज की जरूरत नहीं है। बच्ची का भी टीकाकरण हो चुका है। बच्ची को सफल टीकाकरण एवं मां की सभी जांच के बाद पर एहतियात के साथ रहने में कोई खतरा नहीं है। जिला मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी पत्र के अनुसार मां से बच्ची को किसी भी तरह के संक्रमण होने खतरा नहीं है। चूंकि बच्ची की उम्र 3 साल है और वह अबोध है। अबोध होने के कारण उसे मां की सर्वाधिक आवश्यकता है। वह उसका पालन पोषण ज्यादा अच्छे से कर सकती है। इसलिए बच्ची की कस्टडी मां को दे दी गई।

 

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