स्वच्छ इंदौर पर दूषित दाग: 15 मौतों का जिम्मेदार गंदा पानी, MGM की डेथ ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा

स्वच्छ इंदौर पर दूषित दाग: 15 मौतों का जिम्मेदार गंदा पानी, MGM की डेथ ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा
भागीरथपुरा त्रासदी: 5 माह के मासूम सहित 24 ने गंवाई जान, शासन ने माना- उल्टी-दस्त से बिगड़े हालात, 8 अब भी ICU में
इंदौर,यशभारत। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के माथे पर दूषित पानी ने गहरा कलंक लगा दिया है। भागीरथपुरा इलाके में फैली जलजनित बीमारी ने अब तक 24 जिंदगियां लील ली हैं। इस मामले में एमजीएम मेडिकल कॉलेज की विशेष टीम द्वारा की गई ‘डेथ ऑडिट’ रिपोर्ट ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। रिपोर्ट में आधिकारिक तौर पर पुष्टि की गई है कि 24 में से 15 मौतों का सीधा कारण दूषित पानी और उससे पैदा हुआ संक्रमण (उल्टी-दस्त) है।
मासूम की मौत ने झकझोरा, प्रशासन पर उठे सवाल इस त्रासदी का सबसे हृदय विदारक पहलू 5 माह के एक मासूम बच्चे की मौत है, जो दूषित पानी के संक्रमण का शिकार बना। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 29 दिसंबर से शुरू हुए इस प्रकोप ने अब तक 436 से ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में लिया है। हालांकि 390 से अधिक लोग रिकवर हो चुके हैं, लेकिन 33 मरीज अब भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें से 8 की हालत अत्यंत गंभीर बनी हुई है और वे आईसीयू में जीवन-मौत की जंग लड़ रहे हैं।
कलेक्टर शिवम वर्मा को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार:
15 मौतें: सीधे तौर पर दूषित पानी और गंभीर निर्जलीकरण के कारण हुईं।
02 मौतें: एपिडेमिक घोषित होने से पहले की हैं।
04 मौतें: अन्य गंभीर बीमारियों के चलते हुईं।
मृत्यु का स्पष्ट कारण फिलहाल अज्ञात बताया गया है।
लापरवाही का नमूना: सीवेज मिला पानी पीते रहे लोग स्थानीय निवासियों का आक्रोश सातवें आसमान पर है। आरोप है कि पेयजल पाइपलाइन में लंबे समय से लीकेज था, जिससे सीवेज का गंदा पानी पीने के पानी में मिल रहा था। रहवासियों ने कई बार नगर निगम और क्षेत्रीय अधिकारियों को इसकी सूचना दी, लेकिन शिकायतों को अनसुना कर दिया गया। जब तक प्रशासन जागा, तब तक भागीरथपुरा का हर दूसरा घर बीमारी की चपेट में आ चुका था।







