मुख्यमंत्री ने रानी दुर्गावती को दी श्रद्धांजलि, महिला आरक्षण और पाठ्यक्रम में इतिहास शामिल करने पर जोर

जबलपुर: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज (मंगलवार) वीरांगना रानी दुर्गावती के 462वें बलिदान दिवस पर जबलपुर के नारे नाल पहुंचकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। यह वही ऐतिहासिक स्थल है जहां 462 साल पहले आसिफ खान ने गोंडवाना की महारानी रानी दुर्गावती को धोखे से मार दिया था।
महिलाओं के सम्मान और आदिवासियों के उत्थान पर फोकस
इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महिलाओं के सम्मान और आदिवासी समुदाय के उत्थान पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा में 33% महिला आरक्षण की तैयारी चल रही है, और भारतीय जनता पार्टी हमेशा ही महिलाओं के सम्मान में अग्रणी रहेगी। मुख्यमंत्री ने रानी दुर्गावती योजना का भी जिक्र किया, जिसके तहत आदिवासियों के अनाज मिलेट्स पर ₹4000 प्रति क्विंटल तक का अनुदान दिया जा रहा है।
स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल होगा रानी दुर्गावती का इतिहास
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि रानी दुर्गावती का इतिहास स्कूली पाठ्यक्रम में जोड़ा जाएगा ताकि आने वाली पीढ़ियां इस महान महारानी के शौर्य और बलिदान को जान सकें। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती ने 52 लड़ाइयां लड़ीं, जिनमें से 51 में वे विजयी रहीं और उन्होंने 23,000 से अधिक गांवों पर सफलतापूर्वक राज किया।
डॉ. यादव ने कहा कि उन्हें लगता है कि चंद्रशेखर आजाद ने “आजाद जिए हैं, आजाद ही मारेंगे” का नारा रानी दुर्गावती से ही प्रेरणा लेकर दिया होगा, जिन्होंने अपने स्वाभिमान और राज्य की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष किया।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने रानी दुर्गावती के सेनापति आधार सिंह को भी याद किया। उन्होंने बताया कि आधार सिंह ने इस क्षेत्र के जल प्रबंधन के लिए बड़ा काम किया था, जो आज भी प्रासंगिक है। मुख्यमंत्री का यह दौरा रानी दुर्गावती के बलिदान को याद करने और उनके आदर्शों को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।







