भोपाल

देश के 1200 स्टेशनों और 740 से अधिक वर्कशॉप पर चला अभियान  – 150 टन प्लास्टिक कचरे का हुआ निपटान

देश के 1200 स्टेशनों और 740 से अधिक वर्कशॉप पर चला अभियान
– 150 टन प्लास्टिक कचरे का हुआ निपटान
भोपाल यशभारत। भारतीय रेल द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर विशेष आयोजन करते हुए 22 मई से 5 जून तक पंद्रह दिवसीय विशेष अभियान चलाया। इस वर्ष की थीम प्लास्टिक प्रदूषण समाप्त करें के अंतर्गत भारतीय रेल के सभी ज़ोन, मंडल, स्टेशन और कार्यालयों में जन-जागरूकता की विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। इस अभियान में रेलवे कर्मचारियों, यात्रियों, आम नागरिकों और अन्य साझेदारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्लास्टिक कचरे का आकलन, कचरे को अलग-अलग प्रकारों में छाँटना, प्लास्टिक बोतल क्रशिंग मशीनों की स्थिति की समीक्षा, स्वच्छता एवं जल संरक्षण के प्रयास, तथा प्लास्टिक उपयोग में कमी हेतु जागरूकता प्रसार जैसे कदम शामिल थे।
5 जून को पर्यावरण संरक्षण को लेकर संकल्प दिलाया गया। जिसमें प्लास्टिक उपयोग में बदलाव, स्वच्छता और ऊर्जा बचत जैसे विषयों पर ज़ोर दिया गया। रेलवे बोर्ड में यह संकल्प सदस्य (ट्रैक्शन एवं रोलिंग स्टॉक) द्वारा दिलाया गया, जिसमें अन्य बोर्ड सदस्य और ज़ोनल रेलवे के महाप्रबंधक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। इस अवसर पर रेलवे की वार्षिक पर्यावरण सततता रिपोर्ट भी जारी की गई। पूरे अभियान में लगभग 150 टन प्लास्टिक कचरे का सुरक्षित निपटान किया गया, 1230 से अधिक स्टेशनों पर पोस्टर व डिजिटल माध्यमों से जागरूकता फैलाई गई, 740 से अधिक कार्यशालाएं आयोजित की गईं, 1200 स्टेशनों पर स्वच्छता अभियान चलाया गया, 180 से अधिक प्लास्टिक बोतल क्रशिंग मशीनों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई और 230 नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर जन-जागरूकता को बल मिला।
650 करोड़ की समग्र योजना को मिली स्वीकृति
भारतीय रेल पर्यावरणीय स्थायित्व को लेकर निरंतर प्रतिबद्ध है। वर्ष 2025-26 के लिए 750 करोड़ रुपये की एक समग्र योजना को स्वीकृति दी गई है जो पर्यावरण से जुड़ी गतिविधियों को समर्पित है। 3512 स्टेशनों एवं सेवा भवनों पर सौर रूफटॉप की स्थापना के माध्यम से लगभग 227 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता सृजित की गई है। सभी रेलवे स्टेशनों, कार्यालयों और आवासीय परिसरों में 100 एलईडी लाइट्स की व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त, हाइड्रोजन ईंधन आधारित ट्रेनों के विकास, 2014 से अब तक 9.7 करोड़ पौधारोपण, और यात्री कोचों में 100 बायो-टॉयलेट्स की स्थापना जैसे कदमों के ज़रिए रेलवे ने पर्यावरण की दिशा में ठोस पहल की है।

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