हाई कोर्ट का बड़ा फैसला,11 साल पुराने मामले में जबलपुर क्रिकेट एसोसिएशन को राहत, निचली अदालत का फैसला पलटा

हाई कोर्ट का बड़ा फैसला,11 साल पुराने मामले में जबलपुर क्रिकेट एसोसिएशन को राहत, निचली अदालत का फैसला पलटा
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जबलपुर डिवीजनल क्रिकेट एसोसिएशन (JDCA) से जुड़े एक मामले में निचली अदालत के आदेश को आंशिक रूप से संशोधित करते हुए एसोसिएशन को बड़ी राहत दी है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सर्राफ की खंडपीठ ने रिट अपील संख्या 1990/2025 पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत के 20 जून 2025 के आदेश में बदलाव किया।
क्या था मामला?
दरअसल, जबलपुर डिवीजनल क्रिकेट एसोसिएशन को 15 मई 2013 को सहायक पंजीयक, फर्म्स एवं सोसायटी द्वारा नियमों का पालन न करने के कारण भंग कर दिया गया था। इसके बाद, एसोसिएशन ने पंजीयक के समक्ष अपील की, जिसने 31 जनवरी 2014 को एसोसिएशन के पक्ष में फैसला सुनाया और उसे आवश्यक दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया। एसोसिएशन का दावा है कि उसने 25 फरवरी 2014 को इन निर्देशों का पालन किया।
11 साल बाद, एक व्यक्ति (प्रतिवादी नंबर 5) ने 31 जनवरी 2014 के आदेश के खिलाफ दूसरी अपील दायर की। इस अपील को स्वीकार करते हुए, 8 जनवरी 2025 को राज्य सरकार ने 31 जनवरी 2014 के आदेश को रद्द कर दिया और 15 मई 2013 के भंग करने के आदेश को फिर से बहाल कर दिया। इसके बाद, एसोसिएशन ने इस आदेश को चुनौती देते हुए रिट याचिका दायर की। निचली अदालत ने 20 जून 2025 को 8 जनवरी 2025 के आदेश को तो रद्द कर दिया, लेकिन साथ ही 31 जनवरी 2014 के आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसके खिलाफ कोई याचिका दायर नहीं की गई थी।
हाई कोर्ट का फैसला
हाई कोर्ट ने निचली अदालत के इस फैसले को गलत ठहराया। कोर्ट ने कहा कि जब 31 जनवरी 2014 के आदेश को किसी ने चुनौती ही नहीं दी थी, तो उसे रद्द करने का कोई औचित्य नहीं था। कोर्ट ने यह भी कहा कि 11 साल बाद अपील दायर करना गलत था, खासकर तब जब अपीलकर्ता ने आदेश का पालन न होने की शिकायत की थी, न कि आदेश की वैधता पर सवाल उठाया था।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में 20 जून 2025 के आदेश को संशोधित करते हुए 31 जनवरी 2014 के आदेश को रद्द करने वाले हिस्से को हटा दिया। साथ ही, मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन को 15 मई 2013 के आदेश के तहत कोई भी कार्रवाई करने से रोक दिया। इस फैसले के बाद, जबलपुर डिवीजनल क्रिकेट एसोसिएशन की स्थिति फिलहाल 31 जनवरी 2014 के आदेश के अनुसार बहाल हो गई है।







