भोपाल की ‘गुरुनानक टेकरी’ आज भी सुनाती है चमत्कार की कहानी

भोपाल की ‘गुरुनानक टेकरी’ आज भी सुनाती है चमत्कार की कहानी
– जहां गुरुनानक देव ने मिटाया कोढ़, वहीं से फूटी आस्था की बावली
यश भारत भोपाल। सिख धर्म के प्रथम गुरु श्री गुरुनानक देव जी का 556वां प्रकाश पर्व आज पूरे उल्लास और श्रद्धा से मनाया जा रहा है। भोपाल का ऐतिहासिक गुरुद्वारा गुरुनानक टेकरी साहिब श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यह वही स्थान है जहां सैकड़ों वर्ष पूर्व गुरु नानक देव जी ने एक पीड़ित व्यक्ति के कोढ़ को मात्र अपने आशीर्वाद और जल के छींटों से दूर कर दिया था। राजा भोज की नगरी भोपाल, जिसे प्राचीन काल में भोजपाल कहा जाता था, आज केवल अपने तालाबों और स्थापत्य के लिए ही नहीं बल्कि एक अनूठे आध्यात्मिक चमत्कार के लिए भी जानी जाती है। यही वह धरती है जहां सिखों के प्रथम गुरु नानक देव जी का पवित्र आगमन हुआ था।
गुरुद्वारा के 17 सालों से सेवादार महेंद्र सिंह ने बताया कि गणपत लाल नामक व्यक्ति रहा करता था। पाप का मार्ग चुनने के कारण उसे श्राप मिला और वह भयानक कोढ़ रोग से ग्रसित हो गया। जब इलाज, तंत्र-मंत्र और औषधियां सब बेअसर हो गईं, तो उसे नगर से निष्कासित कर दिया गया। वह शहर के बाहर, वीरान पहाड़ी पर एक झोपड़ी में अपना जीवन काटने लगा। आज वही पहाड़ी गुरुनानक टेकरी के नाम से प्रसिद्ध है।

एक दिन पीर जलालुद्दीन उस रास्ते से गुजऱे। गणपत लाल ने उनके चरण पकड़ लिए। पीर ने कहा तुम्हारा उद्धार केवल बाबा नानक ही कर सकते हैं। यही वाक्य उसकी जिंदगी की दिशा बदल गया। गणपत लाल ने गुरु नानक का ध्यान आरंभ किया, और कुछ ही समय बाद, कहा जाता है, गुरु नानक देव स्वयं उनके समक्ष प्रकट हुए।
गुरु जी ने अपने शिष्य भाई बाला जी को जल लाने भेजा। जल कहीं नहीं मिला तो गुरु जी ने संकेत दिया — जल तेरे सामने ही है। बाला ने नीचे खुदाई की और वहीं से जल फूट पड़ा। उसी पवित्र जल से गुरु जी ने गणपत लाल पर छींटे मारे और क्षणभर में उसका कोढ़ मिट गया। गणपत लाल की काया निर्मल हो गई वह सतनाम वाहेगुरु के जयकारे लगाते हुए नाच उठा।
जिस स्थान से वह जल फूटा, आज वह गुरुद्वारा बावली साहिब रामनगर के नाम से जाना जाता है। श्रद्धालु यहां दूर-दूर से आते हैं, पवित्र जल में स्नान करते हैं और अमृत तुल्य जल घर लेकर जाते हैं।
ऐतिहासिक यात्रा से जुड़ा मध्यप्रदेश: गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन में लगभग 80 हजार किलोमीटर की यात्राएं कीं। समाज में समानता, सेवा और सत्य के संदेश के साथ। अपने भ्रमण के दौरान वे ग्वालियर से मध्यप्रदेश में प्रवेश कर भोपाल, खंडवा, उज्जैन, ओंकारेश्वर और बैतूल सहित छह जिलों से गुजऱे। गुरुनानक टेकरी इसी यात्रा की ऐतिहासिक स्मृति है, जहां आज भी श्रद्धालु दीप जलाकर और अरदास कर गुरु जी की कृपा का स्मरण करते हैं।
श्री अखंठ पाठ साहिब का हुआ समापन हुई अरदास
भोपाल के करीब आधा दर्जन गुरुद्वारों में धार्मिक आयोजन किए गए। ईदगाह स्थ्ति गुरुद्वारे में श्री अखंड पाठ साहिब का समापन हुआ इसके साथ ही अरदास की गई। सुबह 8 बजे भेग लगाया गया व कीर्तन का आयोजन हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धलु मौजूद रहे। इसी तरह शहर के अन्य गुरुद्वारों में का धार्मिक आयोजन किए गए। लोगों को प्रसाद वितरण कर लगर खिलाया गया।








