भिंड विधायक ने राजधानी की समस्या पर विधानसभा में लगाया तारांकित प्रश्न -अतिक्रमण, गंदगी और सडक़ों के गड्ढों से राजधानी की जनता परेशान, जनप्रतिनिधि क्यों रहे मौन, जवाबदारियों को लेकर विधायक नहीं हैं गंभीर

भिंड विधायक ने राजधानी की समस्या पर विधानसभा में लगाया तारांकित प्रश्न
-अतिक्रमण, गंदगी और सडक़ों के गड्ढों से राजधानी की जनता परेशान, जनप्रतिनिधि क्यों रहे मौन, जवाबदारियों को लेकर विधायक नहीं हैं गंभीर
23 करोड़ जनसंख्या की चिंता भिंड विधायक को
भोपाल, यश भारत । राजधानी में अतिक्रमण गंदगी और सडक़ों के गड्ढों की समस्याओं को लेकर भिंड विधायक ने विधान सभा में तारांकित प्रश्न लगाया है। जो कि विधायक ने राजधानी की 23 लाख जनसंख्या को ध्यान में रखकर लगाया है। यह प्रश्न शहर के प्रमुख बाजारों में, फुटपाथों, बाजार के कोरीडोर पर अतिक्रमण के साथ ही शहर की पार्किंग व्यवस्था को लेकर लगाया है। जनप्रतिनिधि या मंत्री ने जनता की समस्याओं पर इस तरह का प्रश्न नहीं किया होगा। विधानसभा में इस तारांकित प्रश्र के लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है। एैसा पहली बार होगा कि दूसरी विधानसभा के विधायक ने किसी अन्य शहर की व्यवस्थाओं पर चिंता व्यक्त की है। मध्यप्रदेश विधानसभा के आगामी सत्र में भिंड विधानसभा क्षेत्र के विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह ने राजधानी भोपाल की बढ़ती अव्यवस्थाओं, अतिक्रमण, गंदगी और सडक़ों की बदहाल स्थिति को लेकर नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री से तारांकित प्रश्न पूछा है। यह प्रश्न 31 जुलाई 2025 को उत्तर लगाया गया है। वहीं भोपाल के 6 विधायक जिन्होंने कभी ना तो स्वयं ही शहर की अव्यवस्थाओं पर चिंता व्यक्त की और ना ही विधानसभा में 23 लाख की जनता के हितों के लिए कभी मुददे उठाये। जबकि यहां की समस्या को हल करना स्थानीय विधायक मंत्री और महापौर पार्षदों की है। एैसा एक विधानसभा में नहीं बल्कि सभी विधानसभाओं में यही स्थिति है।
भोपाल के व्यावसायिक परिसरों में अवैध अतिक्रमण
मप्र आऊसिंग बोर्ड, भोपाल विकास प्राधिकरण और नगर निगम द्वारा बनाए गए विभिन्न व्यवसायिक परिसरों जैसे कि प्लेटिनम प्लाजा, डीबी मॉल, 7 नंबर मार्केट, न्यू मार्केट, सागर गेरे रेस्टोरेंट अब फास्टफूड,, वि_ल मार्केट, 10 नंबर मार्केट आदि में स्थानीय व्यापारियों द्वारा फुटपाथ, गलियारों और सार्वजनिक स्थलों पर अवैध अतिक्रमण कर पक्के निर्माण किए गए हैं, जिससे आम जनता को आवागमन में कठिनाई हो रही है।
स्वच्छता और कचरा प्रबंधन की लचर स्थिति
विधायक ने यह भी आरोप लगाया है कि भोपाल नगर निगम द्वारा स्वच्छता व्यवस्था को दरकिनार किया जा रहा है। शहर के प्रमुख स्थानों पर कूड़े के ढेर, आवारा कुत्तों और मवेशियों की भरमार और हाथठेलों, रेहड़ी वालों का मुख्य मार्गों पर अतिक्रमण जैसी समस्याएं आम हो गई हैं।
पार्किंग के अभाव और यातायात अव्यवस्था
विधायक ने यह भी इंगित किया कि भोपाल नगर निगम के आयुक्त, जोन प्रभारी और भवन अनुज्ञा शाखा के अधिकारी शहर की व्यवस्थित योजना में असफल साबित हो रहे हैं। शहर के कई व्यावसायिक भवनों में नियमानुसार पार्किंग नहीं दी गई, जिसके कारण सडक़ों पर अवैध वाहन पार्किंग और ट्रैफिक जाम आम बात हो गई है।
बारिश के मौसम में कंडम वाहनों, अस्थाई दुकानों व झुग्गियों से सडक़ों पर अतिक्रमण
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बारिश के मौसम में पुराने जर्जर वाहन, अस्थाई दुकानें और झुग्गी झोपडिय़ां मुख्य मार्गों पर अतिक्रमण कर रही हैं। उन्होंने मांग की है कि भोपाल शहर को अतिक्रमण मुक्त, स्वच्छ और गड्ढामुक्त बनाने के लिए यदि कोई योजना या विशेष अभियान प्रचलन में हो, तो उसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए।
अतिक्रमण हटने से शहर की स्वच्छता में योगदान
शहर में अगर जनप्रतिनिधि और नगर निगम के अधिकारी स्वच्छता को लेकर गंभीर हैं और वह चाहते हैं कि भोपाल स्वच्छता में नंबर वन आये तो अतिक्रमण मुक्त शहर करना होगा। जब अतिक्रमण नहीं होगा तो गंदगी और बाजारों में भीड़ कम होगी। जो स्वच्छता का पहला कदम होगा।
पार्किंग की व्यवस्था से यातायात सुगम
शहर में जितनी भी निजी बिल्डिंगे बनी हैं अधिकतर पार्किंग विहीन है। जैसे शहर के निजी अस्पताल, व्यवसायिक भवन में पार्किंग के लिए जगह ही नहीं दी गई। इन सभी स्थानों पर वाहनों की पार्किंग सडक़ पर ही होती है जिससे शहर में सडक़ एैसे सभी स्थानों पर यातायात प्रभावित होता है और कई बार घंटों जाम लगा रहता है। यह सब परेशानी शहर के जनता को उठाना पड़ रही है। एैसे अस्पतालों और व्यवसायिक भवनों द्वारा पार्किंग की व्यवस्था की जाए यहां की जनता को यातायात के जाम से राहत मिल सकती है।
सडक़ों पर हमेशा रहते हैं गड्डे
यहां की सडक़ें गड्डों के लिए ही प्रसिद्ध हैं । सडक़ों का नवीनीकरण साल में दो से तीन बार तो किया ही जाता है। जिस पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। एैसा कैसा डामरीकरण किया जाता है जो कुछदिन में ही सडक़ गड्डों में बदल जाती है। उसके बाद फिर से नवीनीकरण या पेचवर्क का कार्य शुरू किया जाता है। वहीं कुछ वीआईपी क्षेत्र हैं जहंा पर तो कभी भी सडक़ का नवीनीकरण होने लगता है। इन क्षेत्रों में पेचवर्क का कार्य नहीं किया जाता है, सिर्फ नवीनीकरण ही होता है।







