मध्य प्रदेश में गौ-मांस व्यापार को मिल रहा बढ़ावा: जीतू पटवारी

मध्य प्रदेश में गौ-मांस व्यापार को मिल रहा बढ़ावा: जीतू पटवारी
भोपाल, यशभारत। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार के हिंदुत्व और गौ-सेवा के दावों पर कड़ा प्रहार किया है। सोमवार को भोपाल में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश की मोहन यादव सरकार और केंद्र की मोदी सरकार की मिलीभगत से भारत दुनिया के शीर्ष गौ-मांस निर्यातकों में शामिल हो गया है। उन्होंने कहा कि एक ओर भाजपा गौ-रक्षा के नाम पर राजनीति करती है, वहीं दूसरी ओर गौ-मांस व्यापार पर 0% GST देकर इसे बढ़ावा दे रही है।
कथनी और करनी में जमीन-आसमान का फर्क
पटवारी ने भोपाल नगर निगम के अंतर्गत आने वाले स्लॉटर हाउस का जिक्र करते हुए कहा कि वहां बड़ी मात्रा में गोवंश के अवशेष मिले हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर निशाना साधते हुए कहा, मुख्यमंत्री जी पहले पूछते थे कि जहां वध नहीं होता वहां टैक्स की क्या जरूरत? आज उसी राजधानी में टन के हिसाब से अवशेष मिल रहे हैं। यह साबित करता है कि भाजपा का गो-प्रेम केवल दिखावा है। उन्होंने विदेशों में (विशेषकर ओमान में) मांस निर्यात के लिए जारी किए गए उन प्रमाण पत्रों पर भी सवाल उठाए, जिनमें कथित तौर पर हलाल मांस की उपलब्धता का आश्वासन दिया गया है।
इंदौर गौशाला कांड: प्रशासनिक विफलता या अपराध?
इंदौर के देपालपुर (हातोद) स्थित नगर निगम की गौशाला में 15 गायों की मौत का मामला उठाते हुए पटवारी ने इसे नैतिक दिवालियापन’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि चारा, पानी और इलाज के अभाव में गायें दम तोड़ रही हैं, जबकि बजट का बंदरबांट हो रहा है। उन्होंने कहा कि कल जब मुख्यमंत्री गौशाला में फोटो खिंचवा रहे थे, तब गाय ने उनके हाथ से चारा तक नहीं खाया, जो सरकार के प्रति बेजुबानों के आक्रोश को दर्शाता है।
किसानों और वादों पर घेरा
मुख्यमंत्री के कृषि वर्ष 2026′ के संकल्प पर तंज कसते हुए पटवारी ने कहा कि ट्रैक्टर चलाने से कोई किसान नहीं बन जाता। उन्होंने भाजपा के संकल्प पत्र के वादों को याद दिलाते हुए पूछा कि गेहूं ₹2800, धान ₹3100 और सोयाबीन ₹6000 प्रति क्विंटल के दाम किसानों को कब मिलेंगे? खाद की किल्लत और लाड़ली बहनों के साथ हो रहे व्यवहार को लेकर भी उन्होंने सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
पटवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री जी कहते हैं कि वह किसान पुत्र हैं, लेकिन केवल ट्रैक्टर चलाने वाला किसान नहीं, ड्राइवर होता है। असली किसान वह है जो खेत में पसीना बहाता है और आज वही किसान खाद के लिए डंडे खा रहा है।







