थानों में पीड़ितों के प्रति संवेदनशील रहें, जीतें आमजन का विश्वास: डीजीपी कैलाश मकवाणा

थानों में पीड़ितों के प्रति संवेदनशील रहें, जीतें आमजन का विश्वास: डीजीपी कैलाश मकवाणा
नववर्ष 2026 के अवसर पर पुलिस महानिदेशक ने पुलिस बल को दिया सेवा और सुरक्षा’ का मंत्र; एआई और तकनीक के उपयोग पर रहेगा जोर
भोपाल, यशभारत। मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने नववर्ष 2026 के अवसर पर प्रदेश के पुलिस बल के नाम एक महत्वपूर्ण संदेश जारी किया है। डीजीपी ने स्पष्ट किया कि पुलिस थाना गृह विभाग की सबसे बुनियादी इकाई है, जहाँ स्टाफ का आचरण और उत्तम चरित्र ही पुलिस की छवि निर्धारित करता है। उन्होंने निर्देश दिए कि थाने आने वाले हर पीड़ित और आवेदक के साथ संवेदनशीलता बरतते हुए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
2025: उपलब्धियों का ऐतिहासिक वर्ष
डीजीपी ने अपने संदेश में वर्ष 2025 को टीमवर्क और नवाचार का प्रतीक बताया। उन्होंने प्रमुख उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि प्रदेश को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में निर्णायक सफलता मिली। डायल-112 और ई-ऑफिस प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू किया गया। रिकॉर्ड संख्या में गुमशुदा बालिकाओं को खोजा गया और एक लाख से अधिक साइबर शिकायतों में ई-जीरो एफआईआर दर्ज की गई। पारदर्शिता के लिए एक ही थाने में लंबे समय से पदस्थ 11,000 से अधिक कर्मियों का स्थानांतरण किया गया।
भविष्य की चुनौती: साइबर फ्रॉड और एआई
आगामी वर्ष 2026 की प्राथमिकताओं पर चर्चा करते हुए श्री मकवाणा ने कहा कि अब अपराधियों से लड़ने के लिए तकनीक का सहारा लेना अनिवार्य है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग और पुलिसकर्मियों पर जोर दिया, ताकि साइबर फ्रॉड के नए तरीकों को विफल किया जा सके।
सिंहस्थ 2028 की तैयारी अभी से
डीजीपी ने भविष्य की बड़ी जिम्मेदारी की ओर संकेत करते हुए कहा कि सिंहस्थ-2028 के सुरक्षित आयोजन के लिए तैयारियों में अभी से तेजी लाई जाए। साथ ही, उन्होंने सड़क सुरक्षा, मादक पदार्थ तस्करों पर नकेल और सोशल मीडिया के माध्यम से तथ्यों की त्वरित प्रस्तुति को प्राथमिकता सूची में रखा है।







