भोपाल में शराब दुकानों की नीलामी ठप्प

भोपाल में शराब दुकानों की नीलामी ठप्प
– दो चरणों में 60 दुकानों के लिए नहीं आई एक भी बोली
भोपाल, यश भारत। राजधानी में आबकारी विभाग द्वारा शराब दुकानों की नीलामी प्रक्रिया उम्मीद के मुताबिक आगे नहीं बढ़ पा रही है। नीलामी के दूसरे चरण में भी किसी ठेकेदार ने टेंडर नहीं डाला, जिसके कारण 31 शराब दुकानों की नीलामी बिना बोली के ही समाप्त हो गई। इससे पहले पहले चरण में भी 29 दुकानों के लिए कोई प्रस्ताव नहीं आया था। इस तरह अब तक कुल 60 दुकानों के लिए एक भी टेंडर प्राप्त नहीं हुआ है।
आबकारी विभाग ने दूसरे चरण के तहत सात समूहों में शामिल 31 शराब दुकानों के लिए टेंडर आमंत्रित किए थे। टेंडर जमा करने की अंतिम समय सीमा दोपहर दो बजे तक निर्धारित की गई थी, लेकिन तय समय तक किसी भी ठेकेदार ने बोली नहीं लगाई। इससे पहले 3 मार्च को पहले चरण में सात समूहों की 29 दुकानों के लिए भी नीलामी की प्रक्रिया पूरी की गई थी, लेकिन उस समय भी कोई टेंडर नहीं आया था।
भोपाल में कुल 87 शराब दुकानों की नीलामी तीन चरणों में की जानी है। पहले दो चरणों में 60 दुकानों की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि अब शेष 27 दुकानों के लिए तीसरे चरण में टेंडर बुलाए गए हैं। इन दुकानों के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 8 मार्च को दोपहर दो बजे तक तय की गई है।
आबकारी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि तीसरे चरण में भी दुकानों के लिए पर्याप्त बोली नहीं आती है तो आगे की कार्रवाई को लेकर शासन स्तर पर निर्णय लिया जाएगा। इस वर्ष शराब दुकानों के लिए करीब 14 करोड़ रुपये से अधिक की आरक्षित कीमत तय की गई है।
सूत्रों के अनुसार टेंडर प्रक्रिया में ठेकेदारों की उदासीनता के पीछे कारोबारी रणनीति भी एक वजह मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि कुछ बड़े ठेकेदार बाजार में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए टेंडर नहीं डाल रहे हैं। पिछले वित्त वर्ष में भी इसी तरह की स्थिति बनने के बाद अंततः सभी 87 दुकानों को चार बड़े समूहों में बांटकर नीलाम किया गया था।
हालांकि इस बार नई आबकारी नीति के तहत सरकार ने बड़े समूहों को छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर दिया है। 87 दुकानों को 20 समूहों में बांटकर नीलामी की प्रक्रिया शुरू की गई है, ताकि छोटे और नए कारोबारियों को भी अवसर मिल सके। माना जा रहा है कि इसी बदलाव के कारण बड़े ठेकेदारों की दिलचस्पी कम दिखाई दे रही है।







