प्रशासनिक लापरवाही ने ली जानें: स्वच्छ इंदौर के दावों के बीच मातम, भोपाल में फूटा आक्रोश

प्रशासनिक लापरवाही ने ली जानें: स्वच्छ इंदौर के दावों के बीच मातम, भोपाल में फूटा आक्रोश
भोपाल, यशभारत। इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जल आपूर्ति के कारण हुई मौतों ने अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले लिया है। शुक्रवार को राजधानी भोपाल में विभिन्न नागरिक संगठनों और पीड़ित परिवारों ने प्रशासनिक विफलता के खिलाफ जंगी प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि यह मौतें कोई ‘प्राकृतिक आपदा’ नहीं, बल्कि ‘प्रशासनिक हत्या हैं।
4 महीने से जहर पी रहे थे लोग, सोता रहा प्रशासन
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि भागीरथपुरा के नागरिक पिछले चार महीनों से बदबूदार और जहरीला पानी पीने को मजबूर थे। स्थानीय निवासियों ने नगर निगम और संबंधित विभाग को दर्जनों बार शिकायतें कीं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। पाइपलाइन मरम्मत के टेंडर फाइलों में दबे रहे और प्रशासन की इसी सुस्ती ने कई घरों के चिराग बुझा दिए।
क्या 2 लाख में लौट आएगी जान?
सरकार द्वारा घोषित मुआवजे पर आक्रोश जताते हुए प्रदर्शनकारियों ने कहा, क्या दो लाख रुपये देने से परिवारों में पसरा मातम कम हो जाएगा? किसी की जान की कीमत इतनी सस्ती नहीं हो सकती। लोगों ने इसे प्रशासन का ‘क्रूर मजाक बताया और मांग की कि परिवारों को सम्मानजनक मुआवजा और आश्रितों को सरकारी नौकरी दी जाए।
स्वच्छता के दावों की खुली पोल
आंदोलनकारियों ने इंदौर की स्वच्छता रैंकिंग पर भी कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक तरफ शहर को चमकाने के लिए करोड़ों खर्च किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी जरूरत यानी साफ पानी देने में तंत्र पूरी तरह विफल रहा। चमकती सड़कों और विज्ञापनों के पीछे की हकीकत बेहद डरावनी है।







