भोपालमध्य प्रदेश

न्याय और सामाजिक सुरक्षा को लेकर दो दिवसीय फोरम का हुआ आयोजन

न्याय और सामाजिक सुरक्षा को लेकर दो दिवसीय फोरम का हुआ आयोजन

भोपाल, यश भारत । न्याय तक पहुंच को सरल बनाने और सामुदायिक पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस के सामुदायिक पुलिस प्रकोष्ठ द्वारा भोपाल में दो दिवसीय फोरम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भोपाल स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के समाज कार्य विभाग, संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष और कोडी संस्थान के सहयोग से 10 और 11 मार्च को आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पुलिस, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर न्याय, सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम की शुरुआत सृजन संस्था के बच्चों द्वारा प्रस्तुत प्रेरक पावर वॉक से हुई, जिसमें बेटियों की सशक्त भूमिका का संदेश दिया गया। इसके बाद विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से साइबर अपराध से बचाव, नशा मुक्ति, महिला अपराधों की रोकथाम और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों पर जागरूकता का संदेश दिया। भोपाल स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के प्राचार्य फादर जॉन पी.जे. ने स्वागत उद्बोधन में सामाजिक कार्य और पुलिस व्यवस्था के समन्वय की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने अपने संबोधन में कहा कि समाज की सहभागिता और मानवीय दृष्टिकोण के बिना प्रभावी पुलिसिंग और न्याय व्यवस्था संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर अपराध और मादक पदार्थों के दुष्प्रभाव के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कई अभियान चलाए गए हैं। इसके साथ ही सड़क सुरक्षा को लेकर वर्ष 2026 में प्रदेश स्तर पर विशेष जनजागरूकता अभियान चलाने की योजना भी बनाई गई है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में साइबर अपराध के विरुद्ध चलाए गए जागरूकता अभियान और “नशे से दूरी है जरूरी” अभियान को व्यापक जनसहभागिता मिली और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना प्राप्त हुई। मुस्कान अभियान के अंतर्गत वर्ष 2025 में विशेष प्रयासों से 14 हजार से अधिक लापता बालिकाओं को खोजकर उनके परिजनों से मिलाया गया, जो पुलिस की एक बड़ी उपलब्धि है।
समापन सत्र में राज्य नीति आयोग के सदस्य ऋषि गर्ग, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संचालक अंशुमान यादव तथा राष्ट्रीय विधि संस्थान विश्वविद्यालय भोपाल के कुलपति एस. सूर्य प्रकाश ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पुलिस, समाज और संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।

कार्यक्रम में विभिन्न जिलों से आए पुलिस अधिकारियों ने भी सामुदायिक पुलिस व्यवस्था से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले जमीनी स्तर के परिवर्तनकर्ताओं को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 150 से अधिक पुलिस अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

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