रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी की फर्जीवाड़े में फंसी साख, MPPSC से IPS तक के सफर पर सवाल

रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी की फर्जीवाड़े में फंसी साख, MPPSC से IPS तक के सफर पर सवाल
भोपाल, यशभारत। प्रशासनिक तंत्र की साख और योग्यता आधारित चयन व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मध्य प्रदेश की पूर्व विधायक ममता मीणा के पति और रिटायर्ड IPS अधिकारी रघुवीर सिंह मीणा के खिलाफ पुलिस विभाग ने वैधानिक धाराओं के तहत FIR दर्ज कर ली है। शासन की उच्च स्तरीय छानबीन समिति द्वारा उनके जाति प्रमाण पत्र को अमान्य और अप्रमाणित घोषित किए जाने के बाद यह बड़ी कानूनी कार्रवाई की गई है।
पूरा मामला 1984 का है, जब रघुवीर सिंह मीणा ने विदिशा जिले से जारी अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र के आधार पर मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) के जरिए पुलिस उपअधीक्षक (DSP) के पद पर नियुक्ति पाई थी। इसी नींव पर आगे बढ़ते हुए वे भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के कैडर तक पहुंचे और दशकों तक प्रशासनिक पदों का आनंद लेते रहे।
मामले में मोड़ तब आया जब उनके जाति प्रमाण पत्र की प्रामाणिकता को लेकर उच्च स्तरीय छानबीन समिति के पास शिकायत पहुंची। विस्तृत जांच और साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद समिति ने इस प्रमाण पत्र को खारिज कर दिया। छानबीन समिति की रिपोर्ट अंतिम और सर्वमान्य होने के कारण अब उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है।
पुलिस और प्रशासनिक हलकों में अब इस बात की चर्चा जोर पकड़ रही है कि फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे वर्षों तक लिए गए सेवा लाभ, वेतन और भत्तों की रिकवरी की कानूनी प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी। वहीं राजनीतिक गलियारों में भी इस घटनाक्रम के बाद हलचल तेज हो गई है। जांच एजेंसियां अब इस आपराधिक विवेचना को तेजी से आगे बढ़ा रही हैं।







