कई राज्यों में तलाश, बदल रही लोकेशन, जमीन सौदेबाजी मामले में फरार आरोपियों की अब तक गिरफ्तारी नहीं, एसआईटी ने सीएसपी ऑफिस से जब्त किए महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड

कटनी, यशभारत। हत्या के आरोपी से जमीन की सौदेबाजी मामले में फरार चल रहे तीन आरोपियों की अब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इस मामले में फरार आरोपी सीएसपी नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज और मारूफ अहमद हनफी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस कई ठिकानेां पर दबिश दे रही है। इसके लिए कई पुलिस की कई टीमों को सक्रिय किया गया है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का दावा है कि आरोपियों की जल्द ही गिरफ्तारी हो जाएगी। उधर दूसरी तरफ निलंबित नगर पुलिस अधीक्षक नेहा पच्चीसिया की अग्रिम जमानत याचिका जिला अदालत से खारिज होते ही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम की पड़ताल भी तेज हो गई है। एएसपी अंजना तिवारी के नेतृत्व में 8 सदस्यीय एसआईटी टीम ने रविवार को कटनी स्थित सीज पड़े सीएसपी कार्यालय को खोलकर तलाशी ली। कार्रवाई के दौरान टीम ने कार्यालय से महत्वपूर्ण फाइलें, केस डायरियां, बीएनएसएस रजिस्टर और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए। इसके अलावा सोमवार को मामले से जुड़े कुछ गवाहों के बयान न्यायालय में दर्ज किए गए।
एफआईआर के बाद से ही फरार हैं आरोपी
मामले में निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज और मारूफ अहमद हनफी के खिलाफ एफआईआर दर्ज है। आरोप है कि हत्या के आरोपितों को डिफाल्ट बेल का लाभ दिलाने के साथ एक करोड़ से अधिक कीमत की जमीन को करीबी के नाम कम कीमत में कराने और भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में उनकी भूमिका रही। एफआईआर के बाद से तीनों गायब हैं। पुलिस ने अरेस्टिंग के लिए इनाम भी घोषित किया है।
संभावित ठिकानों पर दबिश
मामले में नामजद तीनों नामजद आरोपियों पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित होने और सीएसपी दफ्तर से साक्ष्य मिलने के बाद एसआईटी की अलग-अलग टीमें साइबर सर्विलांस और तकनीकी लोकेशन के आधार पर आरोपियों के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। एसआईटी अधिकारियों का कहना है कि विवेचना तेजी से आगे बढ़ रही है और जल्द ही फरार आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
हाईकोर्ट से मिलेगी राहत ?
विगत 29 अगस्त को अदालत में लगातार दो दिनों तक चली मैराथन सुनवाई और करीब 5 घंटे तक तर्कों के बाद सीएसपी नेहा पच्चीसिया और क्षितिज राज बारापात्रे की अग्रिम जमानत याचिका निरस्त कर दी गई थी। निचली अदालत से झटका लगने के बाद अब आरोपियों के पास मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर जाने का ही एकमात्र कानूनी सहारा बचा है। हालांकि जब तक हाईकोर्ट से कोई अंतरिम राहत नहीं मिलती, तब तक एसआईटी और साइबर सेल के पास आरोपियों को गिरफ्तार करने का पूरा कानूनी अधिकार है।







