मार्च क्लोजिंग : वसूली के लिए सरकारी विभाग एक्टिव मोड पर, वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पहले टारगेट पूरा करने पर फोकस, सरकारी दफ्तरों में देर रात तक हो रहा काम

कटनी, यशभारत। मार्च क्लोजिंग को लेकर सरकारी विभाग एक्टिव मोड पर है। वित्तीय वर्ष की समाप्ति को लेकर विभागीय अधिकारियों ने राजस्व वसूली अभियान तेज कर दिया है। विभागों का फोकस है कि 31 मार्च के पहले अधिक से अधिक राजस्व वसूली करते हुए सरकार का टारगेट पूरा किया जाए। यही कारण है कि सरकारी दफ्तरों में देर रात तक काम हो रहा है। कल 14 मार्च शनिवार को जिले में लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिसमे सरकारी विभागों ने बकाया करों की वसूली के लिए शिविरों का आयोजन किया। नगर निगम द्वारा जहां शहर में कई स्थानों पर शिविर लगाकर संपत्ति कर और जल कर की वसूली की गई तो वहीं अन्य विभाग भी वसूली को लेकर सक्रिय रहे। मार्च का महीना विभागीय अधिकारियों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं रहता। राजस्व वसूली, बकाया करों और बिजली बिल केभुगतान को लेकर पूरे महीने माथापच्ची चलती रहती है। वैसे तो इसको लेकर साल भर प्रयास होते हैं लेकिन फरवरी समाप्त होने और मार्च शुरू होने के साथ ही इसके लिए कवायद तेज हो जाती है। शासन स्तर पर भी राजस्व वसूली का टारगेट पूरा करने के लिए निर्देशित किया जाता है। यही कारण है कि इसको लेकर विभागीय अधिकारी पूरे मार्च के महीने में सक्रिय रहकर शासन का टारगेट पूरा करने के लिए मुस्तैदी के साथ जुट जाते हैं।
उपभोक्ताओं पर 112 करोड़ एवं सरकारी विभागों पर 131 करोड़ रुपये बकाया
जिले में बिजली उपभोक्ताओं पर 131 करोड़ रुपये की राशि बकाया है। इसमे सरकारी विभागों से 19 करोड़ रुपये और उपभोक्ताओं से 112 करोड़ रूपए की राशि वसूल की जाना है। यहीकारा है कि बिजली विभाग के अधिकारी बकाया बिलों की वसली के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि बकाया वसूली के लिए बिजली विभाग द्वारा समाधान योजना चलाई जा रही है, ताकि उपभोक्ताओं को राहत देते हुए बकाया राशि जमा कराई जा सके। इस योजना के तहत अब तक केवल 9 से 10 करोड़ रुपये ही जमा हो पाए हैं, जो कुल बकाया का करीब 8 प्रतिशत ही है। विभाग ने बिजली चोरी पर कार्रवाई करते हुए अब तक 4 हजार 322 प्रकरण दर्ज किए हैं।
इन विभागों पर बकाया
विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार पंचायत एवं ग्रामीण विकास पर 140758017 रुपए, महिला बाल विकास विभाग पर 24688104 रुपए, शिक्षा विभाग पर विभाग पर 18295391, आदिम जाति कल्याण विभाग पर 2508199 रुपए, चिकित्सा विभाग पर 2562759 रुपए, वन विभाग 1074951 रुपए, भारत संचार निगम पर 1635860 रुपए, रेलवे विभाग 806384, किसान कल्याण एवं कृषि पर 141436 रुपए, पशु चिकित्सालय विभाग पर 123570, पुलिस विभाग पर 188167 रुपए, सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग पर 233713, तहसीलदार 741703, जल निगम 354083 रुपए, जल संसाधन 228001, आयुर्वेद औषधालय 100933, गृह विभाग 142894 रुपए, लोक निर्माण विभाग 335891 रुपए एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग पर 244316 रुपए बकाया है।
एक अपै्रल से जारी होगी रजिस्ट्री की नई गाइडलाइन
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि एक अपै्रल से नया वित्तीय वर्ष लागू होने के साथ ही आबकारी विभाग द्वारा नया शराब ठेका शुरू किया जाता है और रजिस्ट्री की नई गाइडलाइन भी जारी होती है। बताया जाता है कि आबकारी विभाग द्वारा नए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं और प्रक्रिया चल रही है तो वहीं पंजीयन विभाग द्वारा भी जिला मूल्यांकन समिति की बैठक आयोजित कर रजिस्ट्री की नई गाइडलाइन पर मंथन किया जाएगा।






