मंडलाl माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 की धारा 9 के तहत नैनपुर एसडीएम न्यायालय द्वारा एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया गया है।
अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) नैनपुर श्री आशुतोष महादेव सिंह ठाकुर ने अधिनियम की शक्तियों का प्रयोग करते हुए ग्राम घटेरी निवासी लगभग 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला शांतिबाई पति स्व. नाथूराम झरिया के प्रकरण में सुनवाई करते हुए उनके भरण-पोषण के लिए आदेश जारी किया। प्रकरण में बुजुर्ग महिला शांतिबाई ने आवेदन प्रस्तुत कर बताया था कि उनका भरण-पोषण करने वाला कोई साधन नहीं है तथा उन्हें अपने ही पुत्र से आर्थिक सहयोग नहीं मिल रहा है, जिसके कारण उन्हें जीवन-यापन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मामले की सुनवाई करते हुए एसडीएम न्यायालय ने तथ्यों एवं परिस्थितियों का परीक्षण किया।
सुनवाई उपरांत एसडीएम नैनपुर द्वारा अनावेदक पुत्र करोड़ी लाल को आदेशित किया गया है कि वह अपनी माता शांतिबाई को 2000 (दो हजार रुपये) प्रतिमाह भरण-पोषण भत्ता अनिवार्य रूप से प्रदान करेगा, ताकि बुजुर्ग महिला सम्मानपूर्वक अपना जीवन-यापन कर सकें।
न्यायालय द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि आदेश का पालन न करने अथवा उल्लंघन की स्थिति में अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार तीन माह तक के कारावास की कार्यवाही की जा सकती है। इस निर्णय को क्षेत्र में बुजुर्गों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे यह संदेश गया है कि माता-पिता की सेवा केवल नैतिक ही नहीं बल्कि कानूनी जिम्मेदारी भी है।
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