मध्य प्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग दिलाने की मांग तेज

मध्य प्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग दिलाने की मांग तेज
किसानों के साथ भेदभाव का आरोप , दिग्विजय सिंह
भोपाल, यश भारत। मध्य प्रदेश के बासमती चावल को जीआई (Geographical Indication) टैग दिलाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। इस मुद्दे को लेकर प्रदेश के किसानों के साथ लंबे समय से भेदभाव होने का आरोप लगाया गया है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश में लगभग 100 वर्षों से बासमती चावल की खेती का इतिहास रहा है, इसके बावजूद अब तक प्रदेश के किसानों को जीआई टैग का लाभ नहीं मिल पाया है।
दिग्विजय सिंह ने बताया गया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बासमती चावल की कीमत सामान्य चावल की तुलना में लगभग तीन गुना तक अधिक मिलती है। जहां देश में चावल लगभग 30 रुपये किलो बिकता है, वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब 4 डॉलर प्रति किलो तक पहुंच जाती है। इसके बावजूद मध्य प्रदेश के किसानों को इसका उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। मामले में कहा गया कि प्रदेश के करीब एक लाख से अधिक किसान बासमती चावल की खेती से जुड़े हैं और लगभग 27 लाख मीट्रिक टन उत्पादन होता है। फिर भी प्रदेश के 13 जिलों को अब तक जीआई टैग नहीं मिल सका है।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि वर्ष 2013 में यूपीए सरकार के समय मध्य प्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग देने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन वर्ष 2016 में केंद्र में सरकार बदलने के बाद यह प्रक्रिया निरस्त कर दी गई। आरोप लगाया गया कि इसके बाद उत्तर प्रदेश के कई जिलों को जीआई टैग दे दिया गया, जिससे मध्य प्रदेश के किसान पीछे रह गए। इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री को वर्ष 2025 में पत्र लिखा गया था और 4 फरवरी को राज्यसभा में भी यह विषय उठाया गया था। अब एक बार फिर प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मध्य प्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग देने की मांग की गई है। कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत का मुकाबला पाकिस्तान से है, जहां पिछले कुछ वर्षों में बासमती उत्पादन वाले जिलों की संख्या तीन से बढ़ाकर 48 कर दी गई है। वहीं मध्य प्रदेश के किसानों को अब तक इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है, जो चिंता का विषय है।
साथ ही आरोप लगाया गया कि प्रदेश के किसान हितों की अनदेखी की जा रही है। चेतावनी दी गई कि यदि जल्द ही मध्य प्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग नहीं दिया गया तो इस मुद्दे को लेकर अनशन जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं, जिसकी जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकार पर होगी। इसके अलावा ऑर्गेनिक कपास के मामले में भी गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा गया कि इस संबंध में पहले भी शिकायत की जा चुकी है और संबंधित अधिकारियों को पत्र भी लिखा गया
रिटायरमेंट को लेकर बोले दिग्विजय सिंह – हल्ला होता रहता है
राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने अपने रिटायरमेंट को लेकर चल रही चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस विषय पर समय-समय पर हल्ला होता रहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपनी पार्टी इंडियन नेशनल कांग्रेस से पहले ही कह दिया है कि वह राज्यसभा के दूसरे कार्यकाल के बाद कोई पद या जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते। दिग्विजय सिंह ने कहा कि भले ही वह सक्रिय पदों से दूर रहने का निर्णय लें, लेकिन कांग्रेस पार्टी और उसकी विचारधारा के लिए उनका काम लगातार जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी और संगठन को मजबूत करने के लिए वह हमेशा कार्यकर्ताओं के साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि राजनीति में सक्रिय रहकर पार्टी के लिए मार्गदर्शन और संगठनात्मक कार्य करते रहेंगे, क्योंकि कांग्रेस के लिए काम करना उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।







