महाशिवरात्रि विशेष- यूं ही नहीं कहलाता नर्मदा का कंकर कंकर शंकरः यहां है शिव के द्वादश रूपों का एकाकार
महाशिवरात्रि में यशभारत की खास रिपोर्ट

जबलपुर, यशभारत। सृष्टि के रक्षक और संहारक शिव के देश भर में चारों दिशाओं में द्वादश ज्योतिर्लिंगों की पूजा होती है। इनके पूजन का विशेष महत्व है। जिन्हें हर कोई जानता है, लेकिन एक साथ बारह शिवलिंगों के साथ महाशिवरात्रि पर विशेष पूजन से वही पुण्य प्राप्त होगा जो विशेष ज्योतिर्लिंग स्थानों पर पूजन से होता है। हम यहां आपको शहर के कुछ ज्योर्तिलिंगों के बारे में बता रहे हैं, जहां दूरदराज से लोग पूजन करने पहुंचते हैं।

कचनार सिटी
विजयनगर स्थित भगवान शिव की मुक्ताकाश विशाल मनोहारी प्रतिमा के नीचे गुफा बनाई गई है। जिसमें समस्त बारह ज्योतिर्लिंगों को मूल स्वरूप में स्थापित किया गया है। शिवरात्रि के अलावा सावन मास में भी यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजन करने पहुंचते हैं।

यहां हैं पिप्लेश्वर महादेव
गुप्तेश्वर मंदिर से कुछ दूरी पर स्थित पिपलेश्वर महादेव मंदिर में 2001 में 12 ज्योतिर्लिंगों की स्थापना मृत्युंजय महाराज द्वारा की गई थी। इस मंदिर में शिवलिंगों के साथ विराजित नंदी एक ही दिशा में मुख किए हुए हैं। इस मंदिर में कालसर्प दोष का पूजन विशेष रूप से किया जाता है।

लम्हेटाघाट शनि मंदिर
नर्मदा किनारे स्थित शनि मंदिर में ही शिव के नौ ज्योतिर्लिंग एक ही कतार में विराजमान हैं। किवदंती है कि इंद्र ने यहां पूजन किया था। यह मंदिर लाखों लोगों की आस्था का केन्द्र है। दूरदराज से लोग यहां पूजन करने पहुंचते हैं।
यहां हैं 1008 शिवलिंग
देवताल की पहाड़ियों पर इस मंदिर में 1008 छोटे शिवलिंगों से बडे़ शिवलिंग का निर्माण किया गया है। विशाल शिवलिंग के आधार में स्थित हैं द्वादश ज्योतिर्लिंग। अनेक शिवलिंगों की एक ही स्थान पर प्राप्ति भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करती है।







