
मुंबई, यश भारत
मुंबई के प्रतिष्ठित लिलावती किर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट ने बड़ा निर्णय लेते हुए स्थायी ट्रस्टी राजेश मेहता की सेवाएं समाप्त कर दीं। ट्रस्ट ने उन पर वित्तीय धोखाधड़ी, दबाव बनाने, धमकी देने और अस्पताल पर नियंत्रण हथियाने की कोशिश जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों के अनुसार, बहुमत में मौजूद ट्रस्टियों ने 16 फरवरी 2026 को सर्कुलर रेजोल्यूशन पारित कर राजेश मेहता को ट्रस्टी पद से हटाने का फैसला लिया। इस निर्णय को महाराष्ट्र चैरिटी कमिशन से भी स्वीकृति मिलने का दावा किया गया है।
लिलावती अस्पताल और रिसर्च सेंटर के ट्रस्टी राजीव मेहता ने बताया कि राजेश मेहता ने पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह के साथ मिलकर कथित तौर पर अवैध गतिविधियां कीं। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के बहुमत ट्रस्टियों ने यह निष्कर्ष निकाला कि राजेश मेहता का आचरण ट्रस्ट के हितों के विरुद्ध और कानून के दायरे से बाहर है।
टर्मिनेशन लेटर में स्पष्ट शब्दों में कहा गया है कि राजेश मेहता का व्यवहार “अत्यंत खतरनाक और अस्वीकार्य” है। पत्र में यह भी उल्लेख है कि उन्होंने ट्रस्ट के कामकाज में जबरन हस्तक्षेप किया, ट्रस्टियों को डराने-धमकाने का प्रयास किया और संस्था के संचालन को प्रभावित करने की कोशिश की।
चैरिटी कमिशन की टिप्पणियों का हवाला देते हुए ट्रस्ट ने कहा कि जांच में राजेश मेहता द्वारा दबाव, धमकी और ट्रस्ट के कामकाज में हस्तक्षेप की पुष्टि हुई है। इसी आधार पर उन्हें ट्रस्टी पद के लिए अयोग्य माना गया।
इस कार्रवाई के बाद मुंबई के चिकित्सा और ट्रस्ट जगत में हलचल मच गई है। लिलावती अस्पताल प्रबंधन ने दोहराया है कि संस्था की प्रतिष्ठा, पारदर्शिता और मरीजों के हितों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।







