महाशिवरात्रि पर यशभारत विशेष : शिवालयों में उमड़ेगा आस्था का सैलाब, कहीं विराजे रूपनाथ तो कहीं स्वयंभू भोलेनाथ

कटनी, यशभारत। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर संस्कारधानी कटनी का कण-कण शिवमय होने जा रहा है। जिले के प्राचीन और सिद्ध शिवालयों में भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ जुटेगी। कटनी जिला न केवल अपनी खनिज संपदा के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां स्थित शिव मंदिर अपनी प्राचीनता, चमत्कारिक इतिहास और अनोखी वास्तुकला के लिए पूरे प्रदेश में पहचाने जाते हैं। आइए जानते हैं कटनी के उन प्रमुख धामों के बारे में, जहां महाशिवरात्रि पर दर्शन मात्र से कष्टों का निवारण होता है।
रूपनाथ धाम, जहां रुकी थी भोलेनाथ की बरात
बहोरीबंद स्थित रूपनाथ धाम आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। मान्यता है कि भगवान शिव जब माता पार्वती को व्याहने जा रहे थे, तब उनकी बरात यहां रुकी थी। पहाड़ी पर स्थित तीन प्राकृतिक कुंडकृराम, सीता और लक्ष्मण कुंड श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र हैं। यहां साल भर पानी भरा रहता है। यहां मौर्य सम्राट अशोक का शिलालेख भी मौजूद है, जो इसे आध्यात्मिक के साथ.साथ ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण बनाता है।
सिद्ध पीठ मघई मंदिर, 200 साल पुराना जागृत स्थान
मधई मंदिर अपनी चमत्कारिक महिमा के लिए जाना जाता है। जनश्रुति है कि यहां एक समय में एक मृत व्यक्ति पुनर्जीवित हो गया था। घनघोर जंगल के बीच प्रकट हुए स्वयंभू शिवलिंग की महिमा ऐसी है कि महाशिवरात्रि पर यहां तिल रखने की जगह नहीं बचती। यहां विधि विधान से अभिषेक और पार्थिव शिवलिंग निर्माण की परंपरा दशकों से चली आ रही है। और प्रति वर्ष कैलाश पाठक भोले महाराज द्वारा शिव बारात भी निकाली जाती है।
कामकंदला, कलचुरी कालीन स्थापत्य का बेजोड़ नमूना
कलचुरी वंश के राजाओं द्वारा निर्मित यह स्थान अपनी भव्य नक्काशी के लिए विख्यात है। यहां का शिव मंदिर ऊंची दीवारों और नक्काशी दार स्तंभों से सुसज्जित है। यद्यपि अब यहां केवल गर्भगृह और शक्तिपीठ शेष हैं, फिर भी भक्तों की आस्था यहां अटूट है। पुरातत्व विभाग के अधीन होने के कारण इतिहास प्रेमी भी यहां बड़ी संख्या में पहुँचते हैं।
भरभरा और श्रीरामघाट, राम शिव मिलन का प्रतीक
कटनी जबलपुर मार्ग पर स्थित भरभरा वह पावन भूमि है, जहां त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने स्वयं शिव पूजा की थी। शिल्परा नदी के किनारे खुदाई में प्राप्त प्राचीन शिवलिंग और गणेश प्रतिमाएं इस स्थान की पौराणिकता को प्रमाणित करती हैं। महाशिवरात्रि पर यहाँ विशेष मेले का आयोजन होता है।
200 वर्ष पुराना है मधई मंदिर का इतिहास
जब-जब महाशिवरात्रि आती है, तब-तब समूचा वातावरण ओम नम: शिवाय के जयघोष से गुंजायमान हो उठता है। इसी दिव्य परंपरा को साक्षात साकार करता हुआ नगर का 200 वर्ष प्राचीन मघई मंदिर एक बार फिर देवाधिदेव भगवान शिव शंकर की अखंड भक्ति में डूबने जा रहा है। कल महाशिवरात्रि महोत्सव का भव्य एवं भक्तिमय आयोजन श्रद्धा, उल्लास और शिवमय वातावरण के साथ किया जाएगा। प्राचीन काल से आस्था का केंद्र रहा मघई मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि शिव भक्ति की जीवंत धरोहर है। इस अवसर पर मंदिर परिसर को पुष्पों, दीपों एवं विद्युत सज्जा से अलंकृत किया जाएगा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ए घंटा-घडिय़ालों की ध्वनि और हर ओर गूंजता हर हर महादेव का जयकारा वातावरण को पूर्णत: शिवमय बना देगा। सुबह से ही श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक कर पुण्य लाभ अर्जित करेंगे। दोपहर 1 बजे महाअभिषेक के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शिवलिंग का विधिवत पूजन किया जाएगा। दोपहर 3 बजे भगवान शिव शंकर जी की पावन एवं दिव्य बारात निकाली जाएगी, जिसमें भक्त शिवपार्वती के स्वरूपों के दर्शन कर भावविभोर हो उठेंगे। सायंकाल पंच महाआरती के समय दीपों की लौ के साथ श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। प्रसाद वितरण के पश्चात रात्रि 8 बजे से उज्जैन के प्रसिद्ध भजन गायक किशन भगत द्वारा प्रस्तुत शिव भजन श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर देंगे। भजनों के माध्यम से शिव महिमा, वैराग्य और करुणा का दिव्य संदेश गूंजेगा।
नीलकंठेश्वर धाम में अभी से जुट रहे भक्त
नीलकंठेश्वर धाम में अभी से जुटने लगी भक्तों की भीड़ जुटने लगी है। महाशिवरात्रि रात्रि पर हर वर्ष यह स्थान आस्था का केंद्र बन जाता है। शिवरात्रि पर बड़ी संख्या में भक्तों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए आयोजन समिति की तैयारियों में जुटी है। विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र में स्थित नीलकंठेश्वर भक्ति धाम सलैया, पडख़ुरी महाशिवरात्रि आयोजन होना है। यह स्थान विजयराघवगढ़ से लगभग 12 किमी दूर स्थित है और श्रावणए महाशिवरात्रि जैसे पों पर यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
होगी सुमधुर भजनों की प्रस्तुति
आयोजन समिति से मिली जानकारी के अनुसार इस दिन हेमंत ब्रजवासी ;मथुराद्ध के भजनों की प्रस्तुति होगी। नीलकंठेश्वर भक्तिमंडल की ओर से सभी श्रद्धालुओं से हार्दिक आग्रह है कि वे इस पावन महोत्सव में सपरिवार शामिल हों और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करें। संरक्षक व आयोजक मदनलाल ग्रोवरबाबू ग्रोवर, रुद्राक्ष ग्रोवर, नीलकंठेश्वर भक्ति धाम में सभी भक्तों से समय पर पहुंचने की अपील की है।
प्रकाश स्तंभ बना
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी यहां पर शिवरात्रि के भव्य आयोजन की तैयारी चल रही है। भक्तों ने बताया कि यह धाम अब केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि सनातन चेतना, शिव शक्ति उपासना और जनआस्था का जीवंत प्रकाश स्तंभ बन चुका है। अब यहां पर हमेशा शिव भक्तों की भीड़ बनी रहती है। पहले शिवशक्ति उपासक मदनलाल ग्रोवर ने रखी थी और वर्तमान में परंपरा का निर्वहन बाबू ग्रोवर तथा रुद्राक्ष ग्रोवर द्वारा पूरी निष्ठा, सेवा भाव और समर्पण के साथ किया जा रहा है।
रोशन नगर में भी होंगे विविध आयोजन
महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर कल प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी श्री राम जानकी हनुमान मंदिर रोशन नगर कटनी मंदिर परिसर में विराजित शिव पार्वती जी का पूजन अभिषेक हवन महाशिवरात्रि के दिन प्रात: 11.30 बजे से आरंभ किया जावेगा जिसमें कि आप सभी सपरिवार सादर आमंत्रित है कृपया पधार कर मंदिर में होने वाले कार्यक्रमों में शामिल होकर धर्म लाभ प्राप्त करें।
महाशिवरात्रि पर शिवशक्ति धाम गंगोटी जुटेंगे शिवभक्त
महाशिवरात्रि के दिन कल रविवार को शिवशक्ति धाम गंगोटी कैलवारा कलां में हर वर्ष की तरह इस बार भी शिव भक्तों का तांता लगेगा यहां पर सुबह से ही विशेष हवन पूजन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी। गंगोटी शिव शक्ति धाम में महाशिवरात्रि का पर्व बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ हर साल मनाया जाता है। यहां पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम स्थानीय लोगों के लिए आस्था का केंद्र रहते हैं। महाराष्ट्र महाशिवरात्रि पर शिव शक्ति धाम गंगोटी में आसपास के कई ग्रामों के अलावा शहर से भी बड़ी संख्या में शिव भक्त एकत्र होते हैं।
महाशिवरात्रि पर निकलेगी बाबा महाकाल की पालकी यात्रा
श्री महाकाल सरकार सेवा समिति के तत्वावधान में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक कल 15 फरवरी को प्रात: 8 बजे हवन पूजन एवं सायं 4 बजे बाबा महाकाल चंद्रमोलेश्वर स्वरूप में भव्य नगर भ्रमण पालकी यात्रा निकाली जाएगी। नगर भ्रमण के पश्चात बाबा महाकाल व माता पार्वती का दिव्य विवाह, द्वारचार एवं संबंधित धार्मिक कार्यक्रम संपन्न होंगे। इसी तरह 16 फरवरी को दोपहर 12 बजे से कन्या भोज एवं भंडारा प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया है। 17 फरवरनी को दोपहर 12 बजे से मातृशक्ति का सुहागले कार्यक्रम बाबा महाकाल एवं माता पार्वती की प्रतिमा के समक्ष संपन्न होगा, इसके पश्चात बाबा महाकाल व माता पार्वती का विसर्जन ढोल-बैंड के साथ कैलाश धाम प्रस्थान हेतु गाटर घाट या मसुरहा घाट में संपन्न होगा। श्री महाकाल सरकार सेवा समिति ने समस्त श्रद्धालुओं से धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होकर पुण्यलाभ अर्जित करने का आग्रह किया है।
आधारकाप में निकलेगी शिव बारात
महाशिवरात्रि के महापर्व पर पूर्व कि तरह इस वर्ष भी भगवान भोलेनाथ माता पार्वती कि बारात बड़े धूमधाम से महेश सोधिया ठेकेदार के आधार काप स्थित निवास से रविवार 15 फरवरी को निकलेगी, जिसमें आधारकाप निवासी बड़े हर्षोल्लास से जगह-जगह नाचते गाते हुए स्वागत एवं प्रसाद ग्रहण करते हुए सम्मिलत होंगे। सभी श्रद्धालुओं से शामिल होने का आग्रह किया गया है।
कन्हवारा के प्राचीन मंदिर में होंगे अनेक अनुष्ठान, भरेगा मेला
जिला मुख्यालय से महज 14 किलो मीटर दूर स्थित कन्हवारा के अति प्राचीन शिव मंदिर के तत्वावधान में महाशिवरात्रि के अवसर पर भव्य शिव बारात का आयोजन किया जा रहा है।आयोजनकर्ताओ ने बताया हनुमान गढ़ी कन्हवारा से शिव मंदिर भव्य और ऐतिहासिक शिव बारात रविवार की शाम 6 बजे निकाली जाएगी एक साथ मंदिर परिसर में मेले का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें डमरू की गूंज, बैंड-बाजे और झांकियां आकर्षण का केंद्र होंगे। यह आयोजन कटनी के कन्हवारा सहित विभिन्न क्षेत्रों में भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद लोकप्रिय है। भव्य शोभायात्रा में झांकियांए और धूमधाम के साथ उत्सव के रूप में मनाया जाएगा। कार्यक्रम में दूर दूर से दर्शनार्थियों का आना होता है।







