विश्व कैंसर दिवस विशेष: समय पर पहचान से कैंसर पर जीत, महाकोशल में बढ़ रही इलाज की उम्मीद
बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक इलाज की सुविधा

जबलपुर, यशभारत। विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर महाकोशल अंचल से कैंसर को लेकर चिंताजनक, लेकिन उम्मीद जगाने वाली तस्वीर सामने आई है। क्षेत्र में कैंसर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, वहीं समय पर जांच और बेहतर इलाज से बड़ी संख्या में मरीज स्वस्थ जीवन की ओर लौट रहे हैं। मेडिकल कॉलेज और स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट बताती है कि पुरुषों में मुंह के कैंसर के मामले सर्वाधिक हैं, जबकि महिलाओं में स्तन (ब्रेस्ट) और बच्चेदानी (सर्वाइकल) कैंसर प्रमुख रूप से सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार तंबाकू, खैनी और नशे वाले मंजन इसके मुख्य कारण हैं।
स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2023 की तुलना में 2025 तक आईपीडी मरीजों की संख्या दोगुने से भी अधिक हो चुकी है। पहले जहां मरीज इलाज के लिए नागपुर, इंदौर, मुंबई या दिल्ली का रुख करते थे, अब महाकोशल और बुंदेलखंड के करीब 22 जिलों के मरीज जबलपुर में ही इलाज करा रहे हैं।
बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक इलाज की सुविधा
मेडिकल कॉलेज ने स्तन कैंसर की सस्ती जांच और उपचार तकनीक विकसित कर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। संस्थान में मेमोग्राफी, पैप स्मीयर, बायोप्सी जैसी जांच सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके साथ ही रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी, टार्गेट थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी भी दी जा रही हैं। वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 100 मरीजों को रेडियोथेरेपी और 150 मरीजों को कीमोथेरेपी दी जा रही है। कुछ अत्याधुनिक मशीनें मिलने के बाद इलाज की प्रतीक्षा अवधि और कम होने की उम्मीद है।
मरीजों की जुबानी जीत की कहानियां
28 वर्ष की उम्र में स्तन कैंसर को मात देने वाली प्रियांशी ने बताया कि समय पर इलाज, परिवार और अस्पताल के सहयोग से वे पूरी तरह स्वस्थ हो सकीं। इसी तरह प्रमिला बाखरू (सर्वाइकल कैंसर), दीपक जैन (यूरिनरी ब्लैडर), संध्या चौहान, रंजना पटवा (स्तन कैंसर) और विनोद कुमार (आंत का कैंसर) ने भी इलाज के बाद नई जिंदगी की शुरुआत की है।
आंकड़ों में बढ़ता भरोसा
स्टेट कैंसर अस्पताल के आंकड़े बताते हैं कि
वर्ष 2023 में आईपीडी मरीज 14,438 थे
वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 17,869 हुई
वर्ष 2025 में आईपीडी मरीजों की संख्या 33,503 तक पहुंच गई
महंगी दवाओं पर चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि टार्गेट थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी की दवाइयां बेहद महंगी हैं। फेफड़े, स्तन, किडनी और मुंह के कैंसर में उपयोग होने वाली कई दवाइयां कॉमन होने के बावजूद आम मरीज की पहुंच से बाहर हैं। दवाओं की कीमत कम होने से मरीजों को बड़ी राहत मिल सकती है।
विशेषज्ञों की सलाह
कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. श्याम जी रावत का कहना है कि कैंसर में समय पर पहचान, नियमित इलाज, फॉलोअप और संतुलित आहार बेहद जरूरी है। लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय पर जांच कराएं।
वहीं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. श्वेता पाठक ने कहा कि बच्चों में कैंसर के नाम से डरने की जरूरत नहीं है, समय पर इलाज से कई बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हो रहे हैं।








