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कुछ संकल्प पूरे, कुछ ख्वाब अधूरे….कटनी जिले में कुछ ऐसे गुजरा साल, अब नए साल से उम्मीदें

कटनी ( आशीष सोनी )। नया वर्ष नए संकल्पों का साल है। बीते बरस 2025 में कटनी जिले के समग्र विकास को लेकर अनेक योजनाएं बनी, इनमें से कुछ में काम शुरू हुआ भी। कुछ कामों की रफ्तार बेहद सुस्त रही और कुछ काम केवल फाइलों में कैद होकर रह गए। इन कामों का श्रीगणेश नए साल में होगा, ऐसी उम्मीद की जा सकती है। पीपीपी मोड पर ही सही, लेकिन बरस 2025 में मेडिकल कॉलेज की सौगात मिलना कटनी की बड़ी उपलब्धियों में शुमार है। सूबे के राजा डॉ मोहन यादव की अगुवाई में आयोजित माइनिंग कॉन्क्लेव में देशभर से पहुंचे उद्योगपतियों के बीच हुए मंथन का सार चार कंपनियों की कटनी जिले में दिलचस्पी के बतौर सामने आया। इनमें से दो कंपनियां अब धरातल पर उतरने को तैयार हैं, जबकि दो अभी कागजी प्रक्रियाओं को गति दे रही हैं। बीते साल हवाई पट्टी का सपना हवा में ही रह गया, नए बरस में कुछ आस इस दिशा में भी की जा सकती है। नए साल के लिए एक खुशबखबरी यह है कि बरगी नहर का का काम कटनी जिले के हिस्से में पूरा होने को है और संभवतः एक डेढ़ माह में विजयराघवगढ़ के खेत नर्मदा के जल से सिंचित होने लगेंगे। साल 2026 में करीब 25 करोड़ की लागत से फॉरेस्टर प्ले ग्राउंड के रिनोवेशन के काम की प्रगति धीमी जरूर रही, लेकिन आने वाले समय में यह उपलब्धि भी कटनी के विकास के लिए खास होगी।

योजनाओं के बनने और उन्हें मूर्त रूप देने का सिलसिला साल दर साल चलता रहता है। विकास भी सतत चलते रहने वाली एक प्रक्रिया है, लेकिन बीते साल कटनी के नेताओं की इच्छाशक्ति दीगर जिलों की तुलना में कमजोर साबित हुई। पड़ोसी रीवा जैसे जिलों में नए एयरपोर्ट के निर्माण के साथ हवाई सेवा भी शुरू हो गई लेकिन कटनी में हवाई पट्टी महज सपना बनकर रह गई। हवाई पट्टी के लिए दो साल पहले आए 59 करोड़ भी वापस सरकार के खजाने में जमा हो गए, क्योंकि जमीन का क्लियरेंस ही नहीं मिल सका। प्रदेश में संतरी से लेकर मंत्री तक जब भारतीय जनता पार्टी के हों तब विकास के मामले में यश और अपयश दोनों उनके खाते में ही दर्ज होगा। सांसद वीडी शर्मा के दौरे कटनी में कमोवेश हर सप्ताह होते हैं, लेकिन जितनी ज्यादा बार वे आए, उसके मुकाबले कटनी जिले को मिलने वाली सौगातों की संख्या बेहद कम रही। विधायकों ने अपने विधानसभा क्षेत्रों में विकास के कामों को गति देने की कोशिश अवश्य की लेकिन बरस 2026 में जनता की उम्मीदों को वे भी पूरा नहीं कर सके। शहरी क्षेत्र में नगर निगम के जिम्मेदारों ने वार्डों के विकास के लिए नाली, सड़क, सीवर लाइन, बिजली पोल, सामुदायिक भवन सहित अन्य कार्यों के बड़े बड़े इस्टीमेट बनाए। इनमें काम कम, कमीशनखोरी की शिकायतें ज्यादा हुई। अनेक वार्डों में पार्षदों को लेकर जनता की शिकायतें सामने आई। यह भी पता चला कि पार्षदों और इंजीनियर की मिलीभगत से कामों का इस्टीमेट जरूरत से ज्यादा राशि का बना दिया गया। आईपीएस कमिश्नर तपस्या परिहार ने ऐसे कोशिशों पर अंकुश लगाना भी शुरू कर दिया है।

इन कामों को मिली गति

वर्ष 2025 में कई ऐसे काम थे जिनको गति मिली। 18 दिसंबर 2025 का दिन खास रहा। इस दिन जिले के बड़वारा और रीठी इलाकों की सांदीपनी विद्यालय की सौगात मिली। उधर 25 करोड़ की लागत से कटनी के फॉरेस्टर प्ले ग्राउंड में तैयार हो रहे स्पोर्ट्स कम्प्लेक्स के कार्य को भी आगे बढ़ाया जा सका। यहां हाकी, क्रिकेट, फुटबॉल ग्राउंड के साथ इनडोर गेम्स, बैडमिंटन कोर्ट, प्रसाधन, केंटीन, हॉल जैसी सुविधाएं मिलने वाली हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग 30 पर जबलपुर और सतना को जोड़ने वाले फोरलेन निर्माण कार्य से भी लोगों की सुविधाएं बढ़ गई। 194 करोड़ की लागत से 20 किलोमीटर बायपास से लोगों को राहत मिली। इसके अलावा बरगी टनल निर्माण को भी व्यापक रूप से गति मिली है। कटनी जिले के हिस्से में सुरंग और नहर का काम लगभग पूरा होने को है। नर्मदा का जल नए साल में मिलने लगेगा। कटनी जिले में स्लीमनाबाद के पास सोने के भंडार की सूचना पर बीते साल खनन कंपनी के साथ प्रशासन का एग्रीमेंट भी हो चुका है। शीघ्र ही खनन का काम शुरू हो सकेगा।

साल भर रही सियासी सरगर्मी

बरस 2025 राजनीतिक सरगर्मियों का भी साल रहा। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों में संगठन के चुनाव हुए। भाजपा ने अपने जिलाध्यक्ष की दोबारा ताजपोशी की तो कांग्रेस ने शहर और ग्रामीण संगठनों में नए अध्यक्ष दे दिए। दोनों दलों में दर्जनों नेता अध्यक्ष पदों की कतार में लगे थे, जिन्हें मायूसी हाथ लगी। बरस 2026 में शायद इनकी राजनीतिक आकांक्षाएं पूरी हो सकें। कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले नेताओं का बीते साल भी भाजपा में पुनर्वास नहीं हो सका। ये नेता अब भी अपनी नई जमीन की तलाश में हैं। भाजपा ने अपनी जिले की टीम भी काफी इंतजार के बाद घोषित की भी तो इस बार उंगलियां उठने लगी। कांग्रेस तो शायद नए साल में ही अपनी टीम बना पाएगी। नेताओं को सत्ता के पदों मसलन एल्डरमैन, प्राधिकरण और अन्य नियुक्तियों का प्रसाद साल 2025 में नहीं मिल सका। नए साल में इन पदों पर नेताओं की लार फिर टपक रही है।

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