भोपालमध्य प्रदेश

शीतलहर में मुस्तैद मप्र का घुड़सवार दस्ता

शीतलहर में मुस्तैद मप्र का घुड़सवार दस्ता
– मप्र पुलिस के 19 घोड़ों के लिए विशेष इंतज़ाम
– ठंड से बचाव के लिए अस्तबल में लगाई त्रिपाल, सूखी घास बिछौना लगाया

आशीष दीक्षित, भोपाल। मप्र पुलिस की शान माने जाने वाले अश्वरोही दल के घोड़ो को ठंड के सितम से बचाने के लिए पुलिस महकमे ने विशेष व्यवस्थाएं की है। 7 वीं बटालियन के अंतर्गत आने वाले अश्वरोही दल के 19 घोड़ों के लिए सूखी घास के बिछौनों को तैयार किया गया है घोड़े खड़े खड़े ही अराम करते हैं और सोते हैं ऐसे में ठंडे फर्श पर सूखी घास का बिछौना राहत दे रहा है। इतना ही ठंड से बचाने के लिए हीटर और तित्रपाल की भी व्यवस्था की गई है। मप्र पुलिस के घुड़सवार दस्ते में शामिल घोड़े कानून-व्यवस्था, वीआईपी ड्यूटी, परेड और विशेष आयोजनों में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इन घोड़ों की सेहत और फिटनेस को बनाए रखना पुलिस की प्राथमिकताओं में शामिल है।

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अस्तबल में बढ़ाई साफ सफाई
सर्दियों के मौसम को देखते हुए अस्तबलों में साफ-सफाई बढ़ाई गई है और नियमित रूप से सूखी, स्वच्छ घास सभी घोड़ों के पास रखवाई गई है। बिछौने को समय समय पर बदला जा रहा है ताकि नमी ना रहे और संक्रमण का खतरा ना हो। खान-पान के स्तर पर भी घोड़ों के आहार में बदलाव किया गया है।

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पशु चिकित्सकों की देखरेख में तय किया गया आहार
घोड़ों को ठंड के दौरान पौष्टिक और ऊर्जा देने वाला चारा उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसमें संतुलित मात्रा में अनाज, हरा चारा और आवश्यक पोषक तत्व शामिल हैं। पशु चिकित्सकों की सलाह के अनुसार आहार तय किया जा रहा है, ताकि सर्दी के मौसम में होने वाली बीमारियों से उन्हें सुरक्षित रखा जा सके। आवश्यकता पडऩे पर गर्म पानी की व्यवस्था भी की जा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, घोड़ों की नियमित स्वास्थ्य जांच की जा रही है। पशु चिकित्सक समय-समय पर अस्तबलों का निरीक्षण कर घोड़ों की हालत का आकलन करते हैं और आवश्यक दवाइयाँ व सप्लीमेंट दिए जाते हैं।

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अस्तबल में लगाई गई त्रिपाल
घोड़ों को वीआईपी ट्रीटमेंट उपलब्ध कराया जा रहा है। ठंडी हवाओं से बचाव के लिए अस्तबल को चारों ओर से त्रिपाल से ढांका गया है। घुड़सवार दस्ते के प्रशिक्षकों और देखभाल कर्मियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि वे घोड़ों के व्यवहार और स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखें। ठंड के कारण यदि किसी घोड़े में सुस्ती, भूख में कमी या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को सूचना दी जाए।

प्रेक्टिस, मालिश और डाइट पर विशेष ध्यान
संवेदनशील माने जाने वाले घोड़ों की देखरेख को लेकर मप्र पुलिस पूरी तरह सतर्क है। सर्द मौसम के बीच घुड़सवार दस्ते के घोड़ों को स्वस्थ, ऊर्जावान और ड्यूटी के लिए तैयार रखने हेतु अस्तबलों में विशेष व्यवस्थाएँ की गई हैं। लाल परेड स्थित सातवीं बटालियन के अस्तबल में यह देखभाल एक सुव्यवस्थित दिनचर्या के तहत की जा रही है, जहां प्रेक्टिस, मालिश और डाइट तीनों पर बराबर ध्यान दिया जा रहा है। अस्तबल का जिम्मा संभाल रहे पुलिस कर्मियों का कहना है कि १९ घोड़े हैं, जिनकी दिन की शुरुआत सुबह प्रेक्टिस और राइडिंग से होती है। नियमित अभ्यास के बाद घोड़ों को सैंड वॉश दिया जाता है, जिससे शरीर की थकान दूर हो और मांसपेशियाँ रिलैक्स हो सकें। इसके बाद करीब 51 मिनट तक सभी घोड़ों की विशेष मालिश की जाती है। यह मालिश न केवल थकान कम करती है, बल्कि सर्दी के मौसम में मांसपेशियों को सक्रिय और मजबूत बनाए रखने में भी मददगार होती है।

मौसम के अनुसार डाइट में आवश्यक बदलाव भी किए जाते हैं। सर्दियों में घोड़ों को अतिरिक्त ऊर्जा और गर्मी देने के लिए गुड़, अलसी, सरसों का तेल और लूसन घास को आहार में शामिल किया जाता है। वहीं गर्मियों में इनकी जगह शर्बत दिया जाता है, जिससे शरीर में पानी की कमी न हो और लू का असर कम पड़े। इस तरह हर मौसम में घोड़ों की जरूरत के मुताबिक खान-पान में बदलाव किया जाता है।
पुलिस महकमा घोड़ों पर होने वाले खर्च के लिए अलग से बजट की व्यवस्था करता है। आर्थिक दृष्टि से भी घोड़ों की देखभाल पर अच्छा-खासा खर्च आता है। औसतन एक घोड़े की डाइट पर प्रतिदिन करीब 250 रुपए खर्च होते हैं। इस तरह डाइट और दवाओं पर मिलाकर प्रत्येक घोड़े पर सालाना लगभग 1.10 लाख रुपए का खर्च आता है। पुलिस विभाग का मानना है कि यह खर्च घोड़ों की सेहत और उनकी कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए जरूरी है।

ठंड से बचावे के लिए इंतजाम किए गए
अश्वरोही दल के सभी घोड़ों के लिए ठंड से बचाने के इंतजाम किए गए हैं। त्रिपाल लगाई गई है व सूखी घास उपलब्ध कराई जा रही है। समय समय पर मालिश और वर्जिश भी कराई जा रही है। अश्वरोही दल में कर्मचारी पूरा ख्याल रख रहे हैं।
– राजेश गौड़, निरीक्षक, 7 वीं बटालियन अश्व रोही दल भोपाल

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