मनरेगा की हत्या कर गरीबों से काम का अधिकार छीना: हरिप्रसाद

मनरेगा की हत्या कर गरीबों से काम का अधिकार छीना: हरिप्रसाद
यश भारत भोपाल। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार मध्य प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में रविवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) के सदस्य और पूर्व सांसद बी. के. हरिप्रसाद ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सुधार के नाम पर लोकसभा में पारित एक नए बिल के जरिए दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना मनरेगा को खत्म करने का काम किया गया है। यह महात्मा गांधी के विचारों और गरीबों के काम के संवैधानिक अधिकार पर सीधा हमला है।
हरिप्रसाद ने कहा कि मनरेगा गांधी के ग्राम स्वराज, काम की गरिमा और विकेंद्रीकृत विकास की अवधारणा का जीवंत उदाहरण रही है। लेकिन मोदी सरकार ने न केवल महात्मा गांधी का नाम हटाया, बल्कि 12 करोड़ से अधिक मनरेगा मजदूरों के अधिकारों को कमजोर किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में कटौती, राज्यों के वैधानिक फंड रोकने, जॉब कार्ड रद्द करने और आधार आधारित भुगतान को अनिवार्य करने से लगभग 7 करोड़ मजदूर योजना से बाहर हो गए हैं। इसके चलते पिछले पांच वर्षों में मजदूरों को औसतन केवल 50 से 55 दिन का ही रोजगार मिल पाया।
उन्होंने कहा कि मनरेगा को अधिकार आधारित योजना से हटाकर अब सशर्त और केंद्र-नियंत्रित योजना में बदला जा रहा है। इससे राज्यों पर करीब 50 हजार करोड़ रुपये का आर्थिक बोझ डाला जा रहा है, जबकि नियम और नियंत्रण केंद्र के हाथ में रहेंगे। ग्राम सभाओं और पंचायतों के अधिकार छीनकर केंद्रीकृत डिजिटल सिस्टम लागू किया जा रहा है, जो सहकारी संघवाद और ग्रामीण जरूरतों के खिलाफ है।
नेशनल हेराल्ड मामले पर बोलते हुए हरिप्रसाद ने कहा कि 12 वर्षों बाद कांग्रेस को बदनाम करने के लिए गढ़ा गया मामला पूरी तरह ढह गया है। न्यायालय द्वारा ईडी का केस खारिज किया जाना बदले की राजनीति पर करारा तमाचा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी से लंबी पूछताछ केवल राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा थी। पत्रकार वार्ता में राज्यसभा सांसद अशोक सिंह, मीडिया विभाग अध्यक्ष मुकेश नायक और प्रदेश के कई प्रवक्ता मौजूद रहे।







