मंडला lकान्हा टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र स्थित पर्यटन ज़ोन में मोबाइल फोन के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। यह निर्णय उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली की ओर से 17 नवंबर 2025 को पारित आदेश के बिंदु क्रमांक 48.5 के अनुपालन में लिया गया है। उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि टाइगर रिजर्व के कोर हैबिटेट के पर्यटन क्षेत्रों में मोबाइल फोन का उपयोग प्रतिबंधित किया जाए। इसी के तहत अब कान्हा टाइगर रिजर्व के कोर ज़ोन में मोबाइल फोन का इस्तेमाल पूरी तरह वर्जित कर दिया गया है। इस आदेश के अंतर्गत अब पर्यटक, गाइड, वाहन चालक, नेचरलिस्ट, होटल संचालक और जिप्सी चालक कोर पर्यटन क्षेत्र में मोबाइल फोन का उपयोग नहीं कर सकेंगे। इस फैसले के बाद पर्यटकों में निराशा देखी जा रही है। कई पर्यटकों का कहना है कि उनके पास महंगे कैमरे नहीं होते और वे मोबाइल फोन के माध्यम से ही अपने परिवार के साथ बिताए गए यादगार पलों की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करते थे।पर्यटकों के अनुसार, कान्हा की यात्रा जीवनभर की स्मृति होती है और मोबाइल फोन इन यादों को सहेजने का एकमात्र साधन था। कान्हा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के संदर्भ में पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ द्वारा निर्देश जारी किए गए थे।
उन्हीं निर्देशों का पालन करते हुए पार्क के कोर पर्यटन क्षेत्र में मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है। सेवानिवृत्त रिसर्च ऑफिसर डॉ. राकेश शुक्ला ने कोर जोन में मोबाइल प्रतिबंध के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि टाइगर रिजर्व का कोर क्षेत्र शांति का क्षेत्र होना चाहिए। इसी उद्देश्य से वहां से पहले ही गांवों का विस्थापन किया गया है। उन्होंने बताया कि मोबाइल फोन के उपयोग से अनावश्यक शोरगुल होता है, जिससे वन्यजीव असहज हो जाते हैं और उनका प्राकृतिक आवास प्रभावित होता है। साथ ही मोबाइल फोन से वन्यजीवों की सुरक्षा पर भी खतरा बढ़ सकता है। डॉ. शुक्ला ने कहा कि इस फैसले से अब पर्यटकों का ध्यान मोबाइल फोन की ओर भटकने के बजाय पूरी तरह प्रकृति, पर्यावरण और वन्यजीवों के अनुभव पर केंद्रित रहेगा।
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