मध्य प्रदेशराज्य

जर्जर छात्रावास में संवारा जा रहा बच्चों का भविष्य : पानी की समस्या से जूझ रहा छात्रावास, कड़ाके की ठंड में तालाब में नहाने जाते हैं छात्र

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यशभारत डिंडोरीl तुम्हारी फाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है…। यह पंक्ति डिंडोरी जिले की शिक्षा व्यवस्था की ज़मीनी हकीकत बयां कर रही है। हम बात कर रहे हैं डिंडोरी जिले के विकास खंड करंजिया के आदिवासी जूनियर बालक छात्रावास बुंदेला का ,जहां जर्जर बिल्डिंग में बच्चों का भविष्य संवारा जा रहा है।

           बता दें कि इस 50 सीटर बालक छात्रावास में महज 13 बच्चे रह रहे हैं जबकि हास्टल अधीक्षक, चौकीदार के हवाले हास्टल छोड़कर चले जाते हैं। इस हास्टल में पानी की बहुत समस्या है जिसके चलते कुंआ का पानी घाट चढ़कर लाया जाता है जिसका उपयोग खाना बनाने और पीने के लिए किया जाता है। वहीं कड़ाके की ठंड में बच्चों को तालाब में नहाने जाना पड़ता है। महत्वपूर्ण यह है कि असुरक्षित तालाब में नहाते वक्त यदि कोई घटना घटे तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? इस सब मामले में हास्टल अधिक्षक मनोज धुर्वे से फोन के माध्यम से जानना चाहा तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया वहीं उच्चाधिकारी जानकारी दिए जाने के बाद सुधार करने की बात कर रहे हैं। ज्ञात हो कि हास्टल में पानी गर्म करने के लिए लाखों की लागत से एक पूरा सिस्टम लगाया गया था वह भी जंग खा रहा है। वहीं दूसरी ओर प्रशासन खामोश है। 

इनका कहना है…

जानकारी प्राप्त हुई है जल्द जांच कर कार्यवाही करेंगेl सी आर कुशराम, बीईओ करंजिया

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