सुभाष नगर ब्रिज दो दिनों से अंधेरे में डूबा

सुभाष नगर ब्रिज दो दिनों से अंधेरे में डूबा
– वाहन चालकों की बढ़ी मुसीबत, शिकायतों को नजर अंदाज कर रहे जिम्मेदार
यश भारत भोपाल। शहर के प्रमुख मार्गों में शामिल सुभाष नगर ब्रिज पिछले दो दिनों से घोर अंधेरे में डूबा हुआ है। ब्रिज पर स्ट्रीट लाइट बंद होने से रोजाना हजारों राहगीरों, दोपहिया वाहन चालकों और राहगीर पैदल यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अंधेरा गहराने के कारण दुर्घटना का जोखिम बढ़ गया है, लेकिन नगर निगम की ओर से अब तक केवल आश्वासन ही दिया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या गंभीर होने के बावजूद जिम्मेदार विभाग लापरवाही बरत रहा है। नरेला विधानसभा क्षेत्र में आने वाले इस ब्रिज पर इससे पहले भी ऐसी ही स्थिति बन चुकी है। करीब एक महीने पहले भी ब्रिज की लाइटें बंद हो गई थीं और तब पूरे 10 दिन तक पूरा पुल अंधेरे में पड़ा रहा। लोगों के लगातार शिकायत करने के बाद ही लाइटें चालू की गई थीं। अब फिर वही हालात बन गए हैं, जिससे नागरिकों में नाराजगी है।
दोपहर और शाम के व्यस्त समय में इस ब्रिज पर ट्रैफिक का दबाव काफी बढ़ जाता है। जो लोग रोज़ाना कार्यस्थलों, बाजारों और स्कूल-कॉलेजों के बीच आवागमन करते हैं, वे खास तौर पर मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। अंधेरे की वजह से लोग दुर्घटनाओं की आशंका लेकर वाहन धीरे-धीरे चलाने को मजबूर हैं। सडक़ किनारे पैदल चलने वाले लोग बताते हैं कि ब्रिज पर रोशनी न होने से गड्ढे, अवरोधक और टूटी पट्टियां दिखती ही नहीं, जिससे फिसलने और गिरने का खतरा बढ़ गया है।
स्थानीय निवासियों ने नगर निगम के कंट्रोल रूम और संबंधित विभाग में कई बार शिकायत दर्ज कराई है। लोगों का कहना है कि अधिकारियों ने “समस्या जल्दी ठीक हो जाएगी” कहकर सिर्फ औपचारिकता निभाई, लेकिन ग्राउंड पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस कारण शिकायतकर्ता और भी अधिक परेशान हो रहे हैं। कई नागरिकों ने सोशल मीडिया पर भी तस्वीरें और वीडियो डालकर स्थिति को उजागर किया है।
क्षेत्र के लोगों का साफ कहना है कि यह ब्रिज शहर की लाइफलाइन है, यहां 24 घंटे रोशनी रहनी जरूरी है। हर महीने लाइटें बंद होना सामान्य बात नहीं होनी चाहिए। नगर निगम को एक स्थायी समाधान निकालना चाहिए।
यातायात विशेषज्ञ भी मानते हैं कि इस तरह के पुलों पर स्ट्रीट लाइट का बंद होना सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है। अंधेरे में वाहन चालकों को सामने आने वाले वाहन, मोड़ और छोटे अवरोधक साफ नहीं दिखते, जिससे हादसे बढऩे की पूरी आशंका रहती है।
ब्रिज के आसपास के व्यापारियों का कहना है कि अंधेरा होने से चोरी जैसी वारदातों का खतरा भी बढ़ जाता है। कई दुकानदार शाम के बाद ग्राहकों का कम आना भी महसूस कर रहे हैं। नगर निगम के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि तकनीकी समस्या के कारण लाइटें बंद हुई हैं और जल्द ही सुधार कर लाइटें चालू कर दी जाएंगी। हालांकि नागरिकों का कहना है कि यह आश्वासन पिछले दो दिनों से सुनने को मिल रहा है और कार्यवाही अभी तक शुरू नहीं हुई है। लगातार अंधेरे में डूबा यह पुल शहर की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। फिलहाल, हजारों लोग रोजाना जोखिम उठाकर इस पुल से गुजरने को मजबूर हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि नगर निगम जल्द से जल्द समाधान कर उन्हें राहत दे।






