सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/ संभाग के छतरपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल भीमकुंड आश्रम के महंत शंकर शरण दास ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली है। गुरुवार सुबह हुई इस दुखद घटना के पीछे महंत के भाई और पुजारियों ने आश्रम के पूर्व गद्दीदारों और एक महिला रसोइया पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
मानसिक प्रताड़ना और ब्लैकमेलिंग का आरोप
महंत के भाई धर्मेंद्र दुबे और पुजारी संतोष मिश्रा ने आरोप लगाया कि महंत शंकर शरण दास पिछले काफी समय से अत्यधिक मानसिक प्रताड़ना झेल रहे थे। उन्होंने इस आत्मघाती कदम के लिए आश्रम के पूर्व गद्दीदार नारायण आचार्य और कमल नयन को जिम्मेदार ठहराया। परिजनों के अनुसार, ये दोनों महंत को लंबे समय से परेशान कर रहे थे और उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दे रहे थे।
महिला रसोइया पर झूठे आरोप लगाने का इल्जाम
परिजनों ने आश्रम की रसोइया रजनी तिवारी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि रजनी तिवारी, पूर्व गद्दीदारों के इशारे पर, महंत को फंसाने की साजिश रच रही थी। महिला ने एक स्थानीय चैनल पर महंत पर छेड़खानी और हाथ पकड़ने के झूठे आरोप लगाए थे। इन्हीं झूठे आरोपों, बदनामी और ब्लैकमेलिंग के अत्यधिक मानसिक तनाव से तंग आकर महंत ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।
तोड़फोड़ की दर्ज कराई थी शिकायत
यश भारत के संभागीय ब्यूरो को मिली जानकारी के अनुसार कुछ दिन पूर्व आश्रम परिसर में तोड़फोड़ की घटना हुई थी। जिसकी रिपोर्ट स्वयं महंत ने स्थानीय थाने में दर्ज कराई थी। जिसके बाद से दुखी महंत आश्रम छोड़कर सागर जिले के बंडा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम रोरामन आ गए थे। वे उक्त घटनाक्रम से तनाव और अवसाद में थे। माना जा रहा है कि इसी घटनाक्रम चलते ही उन्होंने उक्त आत्मघाती कदम उठाया।
चक्का जाम और जांच की मांग
महंत का पोस्टमार्टम गुरुवार दोपहर सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में किया गया। इसके बाद, परिजनों ने पार्थिव शरीर को रखकर रोरामन स्थित बंडा-सागर फोर लेन रोड पर चक्का जाम कर दिया, जिसमें उन्होंने दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
पुलिस का कहना है कि वे इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं जिसमें महंत को प्रताड़ित करने और ब्लैकमेल करने के सभी आरोपों की गहनता से पड़ताल की जाएगी।
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