मंडला lदशहरा में मां दुर्गा की प्रतिमाएं नदी के जल में विसर्जित करने के लिए नगर पालिका व नगर पंचायत के द्वारा प्रतिमाओं के विर्सजन के लिए अलग से कुंड बनाती है और उसमें पानी भरकर विधि विधान से विसर्जन कराया जाता है लेकिन यहां नगर पालिका मंडला की लापरवाही से पर्व के दो माह गुजर जाने के बाद कुंड को छोड़ दिया गया। नपा के द्वारा विर्सजन कुंड को खाली ही नहीं किया गया। लकड़ी के पट्टे और प्रतिमाएं आधी घुली हुई छोड़ दी गई। इतना ही नहीं अस्थाई कुंड होने के चलते पानी रिसाव होकर नर्मदा नदी में मिल गया है। इसको लेकर स्थानीय मूर्तिकारो व आमजनो में नाराजगी देखी जा रही है।
बताया गया है कि मूर्तियों के विसर्जन के लिए बनाए गए कुण्ड हरवर्ष नगर पालिका के द्वारा अस्थाई निर्माण किया जाता है। इसमें लाखो रूपए खर्च नगर पालिका के द्वारा किया जाता है। कुंड बनाने से लेकर पॉलीथिन और पानी का भराव किया जाता है। इसके अलावा प्रतिमाओ के विर्सजन के लिए मशीने लगाई जाती है। कुंड निर्माण में गाइडलाइन का बिल्कुल भी पालन नहीं किया गया है। यहां नगर पालिका मंडला के द्वारा मंडला के नाव घाट और महाराजपुर के संगम घाट में कुंड बनाए है। इन कुंड में प्रतिमाओ के विर्सजन के बाद मिट्टी और लकड़ी के अवशेष को छोड़ दिया गया है। करीब दो माह से अधिक समय हो गया है। दहशहरा पर्व और शरद पूर्णिमा के इसके बाद भी कुंड से अवशेष लकड़ी के पट्टे नहीं हटाए गए है और ना ही कुंड का भराव किया गया है। इस वजह से कभी भी कोई घटना हो सकती है। वार्ड के छोटे बच्चे यहां चोटिल हो सकते है। इसको लेकर स्थानीय पार्षद के द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नावघाट में अस्थाई विर्सजन कुंड का निर्माण कुछ मीटर दूर ही बनाया गया है। कुंड में बीस से अधिक मूर्तियां एक ही स्थान पर एकत्र हो गई। इसकी वजह से खतरनाक तत्व एक निश्चित क्षेत्रफल में बड़े पैमाने पर एकत्र हो जाते हैं और कुंड में सतही पानी नजर आ रहा है। प्रतिमाओ से निकलने वाले रंग व अन्य साज सज्जा के केमिकल पानी भू जल के साथ रिसकर नर्मदा नदी में समा गया। समय पर नगर पालिका के द्वारा कुंड की सफाई नहीं कराई और ना ही उसे बंद किया गया। मूर्तिकार बबला रावत व नर्मदा पर्यावरण समिति के विकास पाठक का कहना है कि कुंड का नियमानुसार बंद नहीं किया जाना नगर पालिका की लापरवाही है। कुंड बड़ी संख्या में प्रतिमाओ के अवशेष व लकड़ी के पटे भरे हुए है। इसको लेकर आमजनो में रोष देखा जा रहा है मूर्तिकारो का कहना है कि स्थानीय निकाय इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। हमे ही लकड़ी पट्टे उठाने की अनुमति दे। कुंड की सफाई हो जाएगी। गत वर्षो में मूर्तिकार व आसपास के लोग ही लकड़ी उठाकर ले जाते रहे और नपा मशीन लगाकर कुंड का पुराव कर देती रही है।
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