जबलपुरमध्य प्रदेश

ट्रेनों से गायब सुरक्षा कवर! यात्रियों की जान पर बन आई आफत

यात्रियों के हाथ लगते ही हो जाती है एसीपी,रेलवे का दावा सुरक्षा का, लेकिन ज़मीन पर हकीकत बिल्कुल उलट

जबलपुर यशभारत। रेलवे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर करोड़ों रुपये खर्च करता है लेकिन जब बात रखरखाव की आती है तो लापरवाही साफ झलकती है। जबलपुर समेत पमरे के कई रूटों पर चलने वाली एक्सप्रेस, सुपरफास्ट और पैसेंजर ट्रेनों में एसीपी (अलार्म चेन पुलिंग) सिस्टम तो लगे हैं लेकिन इन पर लगे सुरक्षा कवर गायब हो गए हैं। स्थिति यह है कि अधिकांश कोचों में एसीपी का हैंडल खुला पड़ा रहता है। इससे जहां बच्चों या अनजान यात्रियों द्वारा गलती से इसे खींचने का खतरा बना रहता है, वहीं सुरक्षा तंत्र पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।ऐसी स्थिति में रेल यात्रियों को जुर्माना भी लगाया जाता है जबकि उनका कोई कसूर नहीं रहता है। अपर बर्थ के ठीक उपर यह चैन पुल्लिंग अलार्म लगा गया है। 

यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ का आलम

एसीपी को यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाया गया था ताकि आपात स्थिति में ट्रेन को रोका जा सके। लेकिन खुले पड़े एसीपी से अक्सर ट्रेनें अनावश्यक रूप से बीच रास्ते में रुक जाती हैं। कई बार जांच में यह पाया गया कि बच्चों ने खेल-खेल में हैंडल खींच दिया या किसी यात्री का हाथ गलती से लग गया। इस तरह की घटनाएं न केवल रेल परिचालन को बाधित करती हैं, बल्कि यात्रियों की जान जोखिम में डाल सकती हैं।

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अधिकांश ट्रेनों में बदहाली

जबलपुर- से दिल्ली एवं अन्य रूट की कई ट्रेनों में एसीपी कवर टूटे या गायब पाए गए हैं। कोच के अंदर लगे ये उपकरण अब किसी भी व्यक्ति की पहुंच में हैं। कई बार यात्री इन्हें गलती से बटन समझकर दबा देते हैं। इस कारण ट्रेन के ब्रेक सिस्टम पर असर पड़ता है और पूरा रेक अचानक रुक जाता है।

संबंधितों की हो रही लापरवाही उजागर

यात्रियों की शिकायतों के बावजूद संबंधित विभाग ने अब तक इस पर ध्यान नहीं दिया है। मेंटेनेंस के दौरान न तो इन कवरों की मरम्मत की जाती है और न ही बदले जाते हैं। कुछ ट्रेनों में तो महीनों से यही स्थिति बनी हुई है। रेलवे के अधिकारी इस मुद्दे पर गोलमोल जवाब देकर मामला टाल रहे हैं।

एसीपी से असुरक्षा का एहसास

यात्रियों का कहना है कि खुले पड़े एसीपी से सफर के दौरान असुरक्षा का एहसास होता है। एक गलती से ट्रेन अचानक रुक जाती है और गार्ड-ड्राइवर को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं, बीच रास्ते ट्रेन रुकने पर यात्रियों को घंटों तक इंतजार करना पड़ता है।

आखिर ऐसी लापरवाही क्यों…?

सवाल यह है कि जब रेलवे यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताता है, तो ऐसी लापरवाही कैसे हो रही है? क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जिम्मेदारी तय की जाएगी?

उपकरण का गायब होना रख रखाव विभाग की अनदेखी

रेलवे की यह लापरवाही यात्रियों की जान के साथ खिलवाड़ से कम नहीं। एसीपी जैसे अहम सुरक्षा उपकरण का गायब होना सीधे-सीधे रखरखाव विभाग की अनदेखी को दर्शाता है। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह लापरवाही कभी भी बड़ा हादसा बन सकती है। यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे को तुरंत सभी कोचों की जांच कर एसीपी कवर लगाना आवश्यक है।

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