अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘एनडीआईडी-डायाकान २०२५’ का सफलतापूर्वक समापन: मधुमेह के आधुनिक उपचार पर मंथन

जबलपुर: जबलपुर में माही डायबिटीज एंड रिसर्च फाउंडेशन, माही डायबिटीज थायरॉइड केयर एवं रिसर्च सेंटर, और माही आईवीएफ वीमेन हेल्थ केयर सेंटर के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय सातवीं अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी एनडीआईडी-डायाकान २०२५ का समापन रविवार, २ नवंबर को हो गया। यह प्रतिष्ठित संगोष्ठी शहर के होटल गुलज़ार में आयोजित की गई। कार्यक्रम का संचालन माही डायबिटीज, थायरॉइड एवं मोटापारोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष डेंगरा ने किया।
उद्घाटन और प्रमुख अतिथि
कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. नवनीत सक्सेना (डीन मेडिकल कॉलेज, जबलपुर), गेस्ट ऑफ़ ऑनर डॉ. संजय मिश्रा जी (डायरेक्टर एवं सीएमएचओ), तथा स्पेशल इनवायटी डॉ. आर एस शर्मा, डॉ. मनीष मिश्रा, डॉ. पंकज बुधोलिया, डॉ. नवीन कोठारी, एवं डॉ. अमरेंद्र पांडे उपस्थित रहे।
अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने साझा किए विचार
इस संगोष्ठी में देश और विदेश के सर्वश्रेष्ठ डायबिटीज विशेषज्ञों ने अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए और मधुमेह के नियंत्रण की आधुनिक तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की।
मुख्य आकर्षण कोलम्बिया से आए विश्व प्रसिद्ध डायबिटीज विशेषज्ञ डॉ. राजाराम करन रहे, जिन्होंने युवा मधुमेह रोगियों के उपचार के बेहतर प्रबंधन पर अपने विचार रखे। हैदराबाद के डॉ. मोहसिन असलम ने मधुमेह में गट माइक्रोबियल मैनिपुलेशन (Gut Microbial Manipulation) के प्रभाव के बारे में बताया।
शोध और सम्मान
संगोष्ठी की शुरुआत पीजी स्टूडेंट्स के पोस्टर प्रेजेंटेशन के साथ हुई। इसमें देशभर से आए पीजी स्टूडेंट्स ने अपने पोस्टर प्रस्तुत किए और सर्वश्रेष्ठ प्रेजेंटेशन को पुरस्कृत किया गया।
नागपुर के सुप्रसिद्ध डायबिटीज विशेषज्ञ डॉ. सुनील गुप्ता को एनडीआईडी डॉ. बीएन श्रीवास्तव ओरेशन से सम्मानित किया गया। उन्होंने नव निदान किए गए (Newly Diagnosed) मधुमेह रोगियों को बेहतर तरीके से कैसे उपचारित किया जा सकता है, इस पर मार्गदर्शन दिया।
नवीनतम उपचार और चुनौतियां
अन्य प्रमुख वक्ताओं ने मधुमेह प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला:रायपुर के डॉ. निखिल मोतिरमानी ने इन्क्लूसीरान ड्रग (Inclisiran Drug) की वास्तविक चुनौतियों एवं समाधानों पर चर्चा की। भटिंडा के डॉ. वितुल गुप्ता ने प्रदूषण एवं डायबिटीज को एक घातक कॉम्बो बताया और इसके प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। मुंबई के डॉ. राजीव कोविल ने टिर्ज़ेपटाइड ड्रग (Tirzepatide Drug) के साथ मेटबोलिक केयर में सफल पथ के बारे में बताया और भारत में इस ड्रग के शुरुआती प्रभाव की जानकारी दी। यह आयोजन मधुमेह के क्षेत्र में नवीनतम शोध और उपचार पद्धतियों को साझा करने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।






