यश भारत संपादकीय- ट्रंप का रवैया अस्थिर मानसिकता का परिचायक
भारत एच-1बी वीजा का इस्तेमाल करने वाला सबसे बड़ा देश

यश भारत संपादकीय- ट्रंप का रवैया अस्थिर मानसिकता का परिचायक
अब्राहम लिंकन का अमेरिका, और डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका में बहुत फर्क है। लिंकन ने अमेरिका में शायद अपने डीप स्टेट की परवाह न की हो सकता है कि तब डीप स्टेट का कॉन्सेप्ट ही न हो अमेरिका में। वर्तमान में अमेरिका के राष्ट्रपति डोन्बल्ड ट्रंप कभी डीप स्टेट के शिकंजे में नजर आते हैं तो कभी वैचारिक रूप से पूरी तरह परिपक्व नजर आने लगते हैं। इससे साबित हो जाता है कि वैचारिक धरातल पर वे अडिग नहीं रह सकते।
एक अस्थिर मस्तिष्क वाले व्यक्ति की छवि बन गई है उनकी। वे केवल भारत के मामले में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में राष्ट्रपति निवसन की तरह व्यवहार करते नजर आते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि वे डीप स्टेट के हिकंजे में है। उनकी अपनी कोई आईडियोलॉजी नहीं है इस कारण कहां जा सकता है कि गंगा गए गंगा दास, यमुन गए यमुना वास यानि ऐसा व्यक्ति जो सिद्धांत विहीन जीवन जी रहा हो। भारत के संदर्भ में उनके कुछ कामों की पड़ताल करते हैं तो हम पाते हैं कि वे दो प्रकार की नीति अपनाते हैं। एक तरफ वे भारत और पीएम मोदी से करीबी होने का दावा करते हैं तो दूसरी तरफ ईरान की चाबहार परियोजना के बहाने भारत पर शिकंजा भी कर रहे हैं। हाल ही में ब्रिटिश पीएम कीम स्टामर के साथ मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि मैं भारत के बहुत करीब हूं और मैं भरत के प्रधानमंत्री के बहुत करीब हूं। ट्रंप मोदी की खूब तारीफ करते हैं। उन्हें ‘महान नेता’, ‘बहुत करीबी दोस्त’, ‘शानदार काम कर रहे नेता’ बताते हैं। लेकिन लगे हाथ वे ऐसे फैसले भी कर रहे हैं, जिनसे भारत के वीर्घकालिक हितों को क्षति पहुंच रही है। ऊंचे आयात शुल्क के जरिए भारतीय उत्पादों की अमेरिकी बाजार में पहुंच सीमित कर देना और रूस से तेल वारीदने के लिए भारत को खरी-खोटी सुवाना अब पुरानी बातें हो गई है।
ताज़ा फैसले में ट्रंप ने 50 प्रतिशत टैरिफ, H-vB वीजा फीस बढ़ाने के बाद अब H-vB वीजा के लिए लॉटरी सिस्टम को एक बदलाव किया है. नए नियम के अनुसार, अब एक लख डॉलर अतिरिक्त आवेदन फीस तो देनी ही होगी, वहीं अब लॉटरी सिस्टम की जगह सैलरी बेरड सेलेक्शन होगा. इसमें में हाई लेवल के टेलेंट और हाई सैलरी वाले प्रोफेशनान्स को प्राथमिकता दी जाएगी. इसके पूर्व उन्होंने भारत को इग्स की तस्करी करने वाले देशों की सूची में डालते हुए कई भारतीय कंपनियों के अधिकारियों का वीजा रद कर दिया है। उधर एच-1बी वीजा पाने की शर्तें ऐसी कर दी है कि अधिकांश भारतीयों के लिए अमेरिका में काम करने जान लगभग नामुमिकन हो जाएगा। मगर इससे भी बड़ी रणनीतिक घोट उन्होंने चाबहार बंदरगाह के मामले में पहुंचाई है। इसके निर्माण एवं संचालन में अमेरिकी प्रतिबंधों से भारत को मिली छूट उन्होंने खतम कर दी है। इस तरह भारत के लिए इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जारी रखना बेहद जोखिम भरा हो गया है। अब अब एच-1बी वीजा से जुड़े नियमों में बदलाव को लेकर खबर आ रही है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप प्रशासन एच-1बी वीजा के शुल्क में डॉक्टरों को छूट दे सकता है, अभी इसका चार्ज 100,000 डॉलर किया जा चुका है, लेकिन डॉक्टरों को राहत मिल सकती है. ट्रंप ने 19 सितंबर को एक नए कानून पर हस्ताक्षर किए थे।
भारत एच-1बी वीजा का इस्तेमाल करने वाला सबसे बड़ा देश है. मेयो क्लिनिक, क्लीवलैंड क्लिनिक और सेंट जुड हॉस्पिटल समेत तमाम बड़े अस्पताल एच-1बी वीजा पर निर्भर हैं. अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन ने चेतावनी दी वी कि वीजा पर लगने वाला भारी शुल्क डॉक्टरों की कमी को बढ़ा देगा. कई अमेरिकी हेल्च सिस्टम और मेडिकल रेजिडेंट्स को लाने के लिए H-VB वीजा पर निर्भरता ज्यादा है. व्हाइट हाउस के प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने कहा, कानून संभावित छूटों को अनुमति देता है. इसमें मेडिकल स्टाफ और डॉक्टर शामिल हो सकते है, अगर वीजा का शुल्क कम नहीं किया गया तो अमेरिका में मेडिकल स्टाफ की कमी बढ़ सकती है.। ट्रंप ने जिस तरह से अपने समर्थकों को खुष्ठ करने के लिए तिकड़मबाजी की है, उसकी वजह से कहीं कहीं अमेरिका में भारतीय छात्रों के जॉब पाने के अरमान भी टूट गए है। अमेरिकी राष्ट्रपति का 11 वीजा की फीस बढ़ाना भारतीय छात्रों के लिए उनके भविष्य की बलि चढ़ाने जैस है। छात्र इस फैसले से बैचेन हो उठे हैं। ट्रंप के फैसले की वजह से सबसे ज्यादा प्रभक्ति विदेशी छात्र हैं, जिसमें भारतीय छात्रों की आबादी सबसे ज्यादा है।
यूएस इंमिवेशन एंड कस्टम एंफोर्समेंट का डाटा बताता है कि अमेरिका में 2024 में 4 लाख से ज्यादा भारतीय पढ़ाई कर रहे थे। यहां पढ़ने वाले ज्यादातर भारतीय साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स फील्ड की पढ़ाई करते हैं। ऐसी स्थिति में कंपनियां भारतीय छात्रों को जॉब देने से बच सकती है और अमेरिकी छात्रों को प्राथमिकता वे सकती हैं। इस बात की प्रबल संभावना भी नजर आ रही है। अगर ऐसा होता है तो फिर लाखों रुपये एजुकेशन लोन लेकर जाने वाले भारतीयों का अमेरिका में जॉब पाने का सपना चकनाचूर हो सकता है। भले ही वे तीन साल STEM-OPT पर जॉब कर पाएं, लेकिन H-VB वीजा तो उनकी पहुंच से बहर ही रहने वाला है। इस तरह कहा जा सकता है कि ट्रंप का फैसला भारतीयों के लिए घातक साबित हुआ है। कुल मिलाकर भारत ही नहीं विश्व के विकसित और विकासशील देशों के साथ उनका रवैया अस्थिर मानसिकता का परिचायक है।







