इस वर्ष मक्के का क्षेत्र लगभग 56 हजार हेक्टेयर से अधिक
रिज फिरो विधि से मक्का की बुवाई से होगा लाभ

रिज फिरो विधि से मक्का की बुवाई से होगा लाभ
इस वर्ष मक्के का क्षेत्र लगभग 56 हजार हेक्टेयर से अधिक
जबलपुर यशभारत।जबलपुर जिले में मक्के के प्रति कृषकों की रुचि अधिक होती जा रही है, इस वर्ष मक्के का क्षेत्र लगभग 56 हज़ार हेक्टेयर जो की पिछले वर्ष से अधिक है उसी को बढ़ावा देते पाटन विकासखंड की अनुविभागीय कृषि अधिकारी डॉ इंदिरा त्रिपाठी ने ग्राम महगवां के किसान हर्ष यादव के खेत में रिज फिरो विधि से लगे मक्के की प्रजाति सिजेंटा 6802 फसल का अवलोकन किया. साथ ही किसानो से आगामी सीजन में रिज फिरो विधि से मक्के की बुआई करने की अपील भी की है।
किसान हर्ष ने बताया की इस विधि का सबसे बड़ा फायदा यह कि इसमें सिंचाई की जरूरत नहीं होती क्योंकि बारिश के पानी से ही खेत को पर्याप्त नमी मिल जाती है. जिसके कारण किसानों का सिंचाई में होने वाला खर्च कम होता है और पैदावार बढ़ती है. मक्के की खेती से अच्छी उपज और आमदनी के लिए किसान रिज फिरो विधि का इस्तेमाल कर सकते हैं.
कैसे काम करती है
रिज फिरो विधि
किसान हर्ष यादव ने बताया कि रिज फिरो विधि में मक्के की बुआई में कतार से कतार की दूरी 8 इंच और पौधे से पौधे की दूरी 24 इंच रखी गयी है. एक एकड़ में मक्के की खेती करने के लिए किसानों को करीब 6 से 8 किग्रा बीज की जरूरत होती है. साथ ही इस विधि के इस्तेमाल से कम पानी में ज्यादा पैदावार मिलती है. बात करें इस विधि की तो, रिज फरो विधि में खेत में मेड़ और नालियां बनाई जाती हैं. वहीं, मक्के के बीज मेड़ पर बोए जाते हैं और नालियों से पानी की निकासी होती है. इससे जड़ों को पर्याप्त नमी मिलती है और खेत में जल भराव भी नहीं होता है. साथ ही फसल की जड़े सीधे पानी के संपर्क में नहीं आती और पानी निकासी के साथ नमी संरक्क्षण भी होता है.
इस विधि से खेती करने के फायदे
किसान बताते हैं की इस विधि से नालियों में जमा नमी मेड़ पर मौजूद पौधों को धीरे-धीरे मिलती रहती है. अच्छी नमी और उचित जल निकासी से फसल अच्छी तरह से बढ़ती है और ज्यादा पैदावार मिलती है. मेड़ पर बुवाई होने के कारण पौधों की जड़े अच्छी तरह से विकसित होकर मजबूत बनती है, जिससे तेज हवा या बारिश में भी फसल गिरने से बच जाती है. वहीं, रिज फरो विधि से नालियों में पानी भरने के कारण खरपतवार को भी को नियंत्रित करने में मदद मिलती है. इस विधि में बारिश के बाद भी मक्के की बुवाई की जा सकती है, जबकि पारंपरिक विधियों में पानी गिरने यानी बरसात के पहले ही मक्के की बुवाई की जाती है। इस विधि में उत्पादन लगभग 20-25 क्विंटल आता है जबकि पारंपरिक विधि में 10-15 किन्टल उत्पादन ही प्राप्त होता है. इस विधि की लागत लगभग 12000 रुपये प्रति एकड़ आती है।
बुवाई से पहले करें गहरी जुताई
मक्के की फसल के बीजों को लगाने से पहले किसानों के लिए बेहद जरूरी है कि वे खेत की अच्छे से गहराई से जुताई करें. खेत की जुताई के लिए किसान मोल्डबोर्ड हल का इस्तेमाल कर सकते हैं . इसका इस्तेमाल कर किसान खेत की 2 से 3 बार गहरी जुताई करें. इसके अलावा मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए रोटावेटर का इस्तेमाल करें . वहीं, जब खेत की जुताई अच्?छे से हो जाए तो खेतों में गोबर की खाद या कंपोस्ट का छिड़काव करें. अगर गोबर की खाद का इस्तेमाल कर रहे हैं तो प्रति एकड़ फसल पर 10 टन छिड़काव करें.
ये रहे उपस्थित
किसान के यहाँ अवलोकन के दौरान अनुविभागीय कृषि अधिकारी डॉ इंदिरा त्रिपाठी, वरिष्ट कृषि विकास अधिकारी पंकज श्रीवास्तव, कृषि विस्तार अधिकारी देव आनंद सिंह, किसान बब्बू पटेल, राजकुमार यादव, रज्जन यादव, खोआराम पटेल, अमित पटेल, आशुतोष पटेल, जीतेन्द्र पटेल सहित बड़ी संख्या में किसान भाई उपस्थित रहे ।
नायक फूड प्रतिष्ठान का भव्य शुभारंभ
जबलपुर, यश भारत। संजीवनी नगर गढ़ा रोड जबलपुर में नायक फूड ( नाद ब्रम्ह इडली ) के प्रतिष्ठान का भाव शुभारंभ गत दिवस रवि गुप्ता अध्यक्ष महाकौशल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष के मुख्य अतिथि एवं पंकज दुबे महामंत्री भाजपा जबलपुर ,आशीष शुक्ला संस्थापक दैनिक यश भारत, डॉ ऋषि डावर वरिष्ठ चिकित्सक के विशिष्ट अतिथि एवं पार्षद श्रीमती प्रिया संजय तिवारी, पार्षद पूजा श्रीराम पटेल ,अखिल मिश्र मानसेवी मंत्री महाकौशल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री जबलपुर, बर्षा चौहान प्राचार्य रॉयल सीनियर सेकेंडरी स्कूल जबलपुर ,आशी खेतपाल प्राचार्य लिटिल मिलेनिया स्कूल जबलपुर ,योग गुरु राहुल अवस्थी एवं योग गुरु पदमाकर तलवारे एवं नायक परिवार के सभी स्नेही जनों की उपस्थित में सम्पन्न हुआ ।







