पुलिस ने बनाई उर्फियत वाले 117 बदमाशों की सूची, अपराध की दुनिया में ब्रांड बनकर खौफ पैदा करने बदमाश रख रहे उर्फियत वाले नाम

पुलिस ने बनाई उर्फियत वाले 117 बदमाशों की सूची
अपराध की दुनिया में ब्रांड बनकर खौफ पैदा करने बदमाश रख रहे ‘उर्फियत’ वाले नाम
– डेढ़ दशक पहले चंद बदमाशों के नाम में शामिल थी उर्फियत
-चंद सालों में उर्फियत वाले बदमाशों की संख्या में हुआ काफी इजाफा
सतीश उपाध्याय, भोपाल।
राजधानी के कुख्यात और अदतन बदमाशों में ‘उर्फियत’ का चलन बढ़ता जा रहा है। पिछले डेढ़ दशक पहले जहां शहर में चंद बदमाश ऐसे थे, जिनको उनके ‘उर्फियत’ वाले नाम से जाना-पहचान जाता था, इनमें से कई बदमाशों के ‘उर्फियत’ की कहानियां भी मशहूर हैं, जो उनके वारदात करने के तरीके, शरीरिक बनावट से मेल खाते है। लेकिन अब शहर के बदमाश अपराध की दुनिया में ब्रांड के तौर पर अपनी खास और अलग पहचान बनाने के साथ लोगों में खौफ बनाए रखने के लिए ‘उर्फियत’ वाले नामों का इस्तेमाल कर रहे हैं। पुलिस ने ऐसे 117 बदमाशों की सूची तैयार की है, जो अपने असली नाम के साथ लगने वाली उर्फियत से भी पहचाने जाते हैं।
भोपाल शहर में डेढ़ दशक पहले शातिर और कुख्यात बदमाशों को ही उर्फियत वाले नामों से जाना जाता था, ये वे बदमाश थे जिन्हें उनके वारदात करने के तरीके, शरीरिक बनावट, मनोवृत्ति, गंभीर अथवा विशेष प्रकार के जुर्म करने के कारण उर्फियत नाम मिले हैं। इन उर्फियत वाले नामों के पीछे एक मुख्य कारण यह भी है कि शहर में एक नाम के कई बदमाश होने के कारण उन्हें पुलिस द्वारा अलग-अलग उर्फियत वाले नाम दिए गए थे।
राजेश छू
इनमें से एक नाम पुराने शहर के शातिर चोर राजेश छू का आता है, जिसे रात के वक्त सूने मकानों में सेंध लगाकर चोरी करने के मामलों को लेकर पहचाना जाता था, वहीं राजेश को ‘छू’ उर्फियत उनके पुलिस गिरफ्त में आने के बाद हाथ से हथकड़ी निकाल कर भागने के लिए मिला था। पुलिस अधिकारी बताते हैं कि शातिर चोर राजेश के हाथ इतने पतले और फ्लेक्सिबल थे कि वह पुलिस द्वारा हाथ में लगाई हथकड़ी को चंद सेकेंडों में निकाल कर भाग जाता था, इसलिए पुलिस अधिकारियों ने उसे उर्फियत के तौर पर छू नाम दिया।
फाईम बम
इसी तरह पुराने ही शहर के फईम बम को आज से डेढ़ दशक पहले बम रखने के मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। वह अपने समय का पहला ऐसा अपराधी था, जिसके पास से पुलिस को बम मिला था। फाईम से पहले किसी के पास से पुलिस ने बम जैस घातक हथियार बरामद नहीं किया था। इसके बाद से फईम के नाम से साथ उर्फियत के तौर पर ‘बम’ लगना शुरू हो गया। अब फईम बम के साथ उसके बेटों ने भी अपने नाम के साथ उर्फियत में बम लगाना शुरू कर दिया है।
मजहर टोपी
बदमाश मजहर के नाम के पीछे उर्फियत के तौर पर टोपी नाम मिला। बताया जाता है कि मजहर जुआ-सट्टा खिलाने और खेलने के लिए कुख्यात था। उसके बारे में कहा जाता है कि जुए-सट्टे में हार के बाद बड़ी चालाकी से किसी को भी रुपयों के लिए मना लेता है और रूपये लेकर चंपत हो जाता है, भोपाली बोलचाल में इसे कारनामे को ‘टोपी पहनाना’ कहा जाता है, यही वजह है कि मजहर को मजहर टोपी के नाम से पहचाना जाने लगा।
सईद अलंगा
आदतन बदमश सईद चोरी, लूट और अन्य वारदातों को अंजाम देता था, इस कारण पुलिस सबसे पहले उसकी तलाश रहती है, लेकिन जब भी उसका पुलिस ने आमना-सामना होता तो वह पकड़े जाने के बचने के लिए पुलिस पर अलंगा यानी भारी पत्थर ‘अलंगा’ से हमला कर देता था। यही नहीं मारपीट की घटनाओं में भी सईद पत्थरों का इस्तेमाल करता है। बताया जाता है कि उसका निशाना भी काफी सटीक होता था, इसी वजह से इस बदमाश का नाम सईद अलंगा पड़ गया है।
जाकिर बकरा
पुलिस की हिट लिस्ट में बदमायश जाकिर का नाम हमेशा रहता है। जाकिर कई बार शहर के अलग-अलग स्थानों पर चोरी, लूट, मारपीट जैसे मामलों में गिरफ्तार हो चुका है। चूंकि जाकिर की कद-काठी बकरे जैसी दिखती है। इसलिए उसे साथी ‘बकरा’ कहकर बुलाते हैं। यहीं से उसे उर्फियत के तौर पर जाकिर के साथ बकरा नाम मिला।
ऐसे कुछ ओर उर्फियत वाले बदमाश
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बदमाश याशीन का नाम ‘मजिस्ट्रेट’ उसकी मनोवृत्ति के कारण पड़ा है। वह खुद अपराध करता था, लेकिन जब अपराध करने वाले उसके अन्य साथी अपराधियों के बीच आपसी झागड़े की बात आती थी तो वह स्वंय को उन लोगों के बीच सुलझ समझौता कराने और न्याय करने के लिए मजिस्ट्रेट जैसी बातें कर मामले सुलझाता था। इस कारण उसको उर्फियत के तौर पर ‘मजिस्ट्रेट’ नाम मिला। इसके अलावा एक जैसे नाम होने पर कुछ बदमाशों को उर्फियत वाले नाम मिले, जैसे सलीम हड्डी, सलीम पेट्रोल, सलीम सिक्स राउण्ड। इन बदमाशों जो दुवला-पतला था उसे ‘हड्डी’, जो पेट्रोल सूंघने का आदी था उसे ‘पेट्रोल’ और जो सिक्स राउण्ड कट्टे के साथ पकड़ा गया था उसे उर्फियत में ‘सिक्स राण्उड’ नाम मिला।
पुलिस की सूची में 117 उर्फियत वाले बदमाश
भोपाल क्राइम ब्रांच ने शहर में उर्फियत वाले नाम से पहचान बनाने वाले आदतन बदमाशों की सूची तैयार की है। इस सूची में शहर के छटे हुए 117 ऐसे बदमाश शामिल हैं, जिनको उनके उर्फियत वाले नाम से अपराध की दुनिया में जान जाता है। इनमें से अधिकांश बदमाशों ने पिछले कुछ सालों में ही अपराध जगत में कदम रखा है।
नाम/उर्फियत
शरीफ बच्चा, शप्पू पिस्टल, सोनू टाइगर, तौफिक सूटर, जावेद लूट , मूत्रा मजिस्ट्रेट, आमिर बर्फ, फहिम बंम, जाकिर बकरा, अनस दाना, जुबेर मौलाना, राजा शाहिद, मौसिन कचौड़ी, शायद राजा, मौहसिन माया, शाहिद कबूतर, शोएब अन्ना, आसिफ कौवा, दानिश लोड स्टेशन, शाहिद कट्टा, जावेद चिकना, फारूख स्टेशन, पप्पू चटका, अरसद बब्बा, शादाब चम्बल, शानू काला, समीर फोड़ा फूनसी, प्रदीप कटसी, नरेश मरघटिया, करण स्टेशन, शानू छोटा, शानू बड़ा, शिराज पत्ती, शिराज पासपोट, सोहेल पंचर, इरफान नग्गे, इरफान तोतली, शाजिद लकेरा, वसीम टैक्कर, मुन्ना खुदरा, बाली बरखेड़ी, शाहरूख रोशनपुरा, शाहिद बंगाली, दानिश केरी, बिट्टू बच्चा, फरहान बच्चा, बसी बोगदा पुल, ओवेश किड़ा, फिरोज बाबा, रफीक चिरकी, राजा एयरपोर्ट, शिराज कबरा, शिराज छोटा, दिलीप लौंडा, जावेद भूरा, युनुस भूरा, एजाज छोटे, साबिर काला, इरसाद काला, फिरोज खबड़ा, फिरोज मुन्ना छड़ी, लूली नोसाद, नासिर वलूट, अकरम मंडी, राशिद चूहा, उवेश छुरी,
नफीस अदालत, अशोक जलजला, दिनेश बनारसी, संजू पिक्च, पंकज साहू, अरूण नागेन्द्र, जुबेर किलकिल, शाहरूख फावड़ा, रजत बगुला, सोनू अन्ना, मोनू काला,
फिरोज लोटिया, पप्पू कटियार, अहमद शाह बॉबी, इरफान ढक्कन, रकीब बराती, सलीम गबरू, फैजान भेड़ा, रिहान गोल्डन, सूरज छिन्दा, हरि सिंह खुजाल, अनस कल्लू, विशाल घेंटा, फैजल बड़ा, फैजल छोटा, नदीम बड़ा, नदीम काला, वसीम बड़ा, आसिफ चिकट, मोसिन पलीत, अजहर मम्मा, मुजफ्फर मंूछ, गोविंद बच्चा/गोगो, तंजिल गोटी, शैलेन्द्र टनटन, रोहित कन्ट्री, गोलू सूटर, सलमान भेड़ा, अबरार कांव कांव, अबरार कलेजी, नसीम घोड़ा, भगवान दास भवानी, रितिक भण्डारी, अकरम मोलाना, रोहित कबाड़ी, विशाल चांटी, संतोष खरगोस, याशीन मजिस्ट्रेट, अनिल अण्डा, अशफाक हेटू, सगीर दद्दा
इनका कहना है-
उर्फियत वाले नाम से पहचाने जाने वाले बदमाशों में से कुछ को उनकी मनोवृत्ति और गंभीर अथवा विशेष प्रकार के अपराध घटित करने पर मिले हैं। पहले इस तरह के उर्फियत वाले नाम के शहर में कुछ बदमाश हुआ करते थे, जिनको उनके नाम के साथ उर्फियत से जाना जाता था। अब उर्फियत वाले नाम चलन का हिस्सा और ब्रांड के तौर पर स्वंय बदमाशों द्वारा अपने नाम के साथ लगाए जा रहे हैं।
सलीम खान, रिटायर्ड उप पुलिस अधीक्षक







